सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन और देयकों का ब्योरा जुटाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाना अब पुरानी बात बनने जा रहा है। एक राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट के दिन से ही सुचारू वित्तीय सुरक्षा और मानसिक शांति देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक प्रशासनिक पहल शुरू की है। नए लागू किए गए डिजिटल सिस्टम के तहत, कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से पूरे 12 महीने (एक वर्ष) पहले ही उनकी पेंशन प्रोसेसिंग, दस्तावेजों का सत्यापन और पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) तैयार करने की कागजी कवायद शुरू कर दी जाएगी।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को सरकार की इस अनूठी पहल की जानकारी साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्त होने जा रहे कर्मचारियों को अंतिम समय में होने वाले प्रशासनिक तनाव और वित्तीय अनिश्चितता से बचाना है।
राज्य सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए 'फिनअसम' नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया है। इस प्रणाली के तहत कर्मचारी के रिटायर होने से ठीक एक वर्ष पूर्व ही पेंशन से संबंधित आवश्यक औपचारिकताओं और सर्विस रिकॉर्ड्स को ऑनलाइन पोर्टल पर प्रोसेस करना शुरू कर दिया जाएगा।
यह डिजिटल सिस्टम पेंशन से जुड़े विभिन्न सरकारी विभागों के बीच वास्तविक समयमें बेहतर समन्वय स्थापित करता है। इसके माध्यम से पेंशनभोगियों के दस्तावेजों का डिजिटल वेरिफिकेशन किया जाता है, जिससे पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) समय पर जारी हो सके। चूंकि रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन और अन्य लाभ मिलना शुरू होने के लिए पीपीओ का होना अनिवार्य है, इसलिए समय पूर्व पीपीओ जारी होना कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है।
पारंपरिक पेंशन प्रणाली में कर्मचारियों को फॉर्म जमा करने, सर्विस बुक सत्यापन और विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने के कई चरणों से गुजरना पड़ता था, जिससे अक्सर भुगतान में महीनों की देरी हो जाती थी। नए 'फिनअसम' मॉडल से कर्मचारियों को निम्नलिखित प्रमुख लाभ मिलेंगे:
इस डिजिटल पहल के सफल क्रियान्वयन में आगे कौन सी चुनौतियां सामने आ सकती हैं?