सरकारी तेल कंपनियां कितना नुकासन झेल रही?
पुरी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियां हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। अगर यही स्थिति जारी रही तो एक तिमाही में इनका कुल नुकसान लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका है। मंत्री ने कहा कि मौजूदा कीमतों पर सिर्फ एक तिमाही का नुकसान ही सरकारी तेल कंपनियों के पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के टैक्स के बाद के मुनाफे को खत्म कर सकता है।
उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बड़ी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में संयुक्त रूप से करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये के नुकसान में जा सकती हैं।
पहले बाजार विशेषज्ञों का अनुमान था कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहीं तो कंपनियों को हर महीने लगभग 27 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। लेकिन वास्तविक नुकसान का आंकड़ा इन अनुमानों से भी ज्यादा तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है, जबकि अब तक कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे ही रही हैं।