कांग्रेस को सीधे तौर पर नहीं दी मदद
इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए थिंक टैंक ने सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी को मदद नहीं की है। इस पत्र को तैयार करने में शोधार्थी नीतिन भारती और सह-निदेशक लुकास चांसेल के अलावा फ्रांस के अर्थशास्त्री थॉमस पिकेट्टी शामिल हैं। चांसेल ने कहा कि हमने इस स्कीम पर सलाह मशविरा किया था और अपने नतीजे पोवर्टी एक्शन लैब के निदेशक प्रोफेसर अभिजित भट्टाचार्य के साथ साझा किए थे।
प्रोफेसर भट्टाचार्य ने फिर इसको कांग्रेस पार्टी को दिया था। भारती और चांसेल ने माना कि 1980 से देश में अमीर-गरीब के बीच खाई और गहरा गई है। इस खाई को कम करने के लिए करोड़पतियों पर टैक्स लगाना पड़ेगा। ऐसा यूरोप और अमेरिका में मौजूद सरकारें बहुत पहले से कर रही हैं। इस टैक्स से सरकार आम जनता पर काफी पैसा खर्च कर सकती हैं।
घर-जमीन पर लगे टैक्स
भारती का मानना है कि भारत में लोगों ने घर और जमीन के तौर पर काफी संपत्ति जमा कर रखी है। ऐसे लोगों की संख्या करीब 90 फीसदी है। इन लोगों पर भी ज्यादा टैक्स लगना चाहिए ताकि गरीब लोगों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च किया जा सके।
रघुराम राजन से ली थी सलाह
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने माना कि कांग्रेस पार्टी ने इस योजना की घोषणा करने से पहले उनसे सलाह ली थी। राजन के मुताबिक देश में किसानों को उपज की सही कीमत न मिलना व गरीबी सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या को खत्म करने के लिए इस तरह की योजना पर काम किया जा सकता है।