कोरोना वायरस महामारी के चलते देश के सभी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। हेल्थ के साथ-साथ लोगों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ी है। लेकिन इस बीच आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को नुकसान नहीं, बल्कि फायदा हुआ है। देश की आउटसोर्सिंग राजधानी बंगलूरू भी महामारी से प्रभावित हुई है, लेकिन इंडस्ट्री पर इसका बुरा असर नहीं पड़ा।
नियुक्तियों में 30 फीसदी इजाफा
भारत की जीडीपी में आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री का योगदान करीब आठ फीसदी है। ऐसे में यह अर्थव्यवस्था के लिहाज से अच्छी खबर है। हालिया बड़े सौदों के चलते नियुक्तियों में 30 फीसदी इजाफा देखने को मिला है। इंडस्ट्री के लीडर्स के अनुसार, इसमें 2019 के मुकाबले 2020 में करीब 10 फीसदी की वृद्धि रही।
इसलिए आई तेजी
ऑर्डर बढ़ने की वजह से मजबूत हायरिंग सेंटिमेंट रहा है, जिससे आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री में तेजी आई। इसके साथ ही इंडस्ट्री में अनिश्चितता के इस काल में हाइब्रिड वर्क इनवायरमेंट से काम में परेशानी नहीं है। दुनियाभर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में निवेश बढ़ने का असर भी इंडस्ट्री पर पड़ा। लागत कम करने के लिए आउटसोर्सिंग बढ़ रही है। इन चार प्रमुख वजहों से आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री में उछाल आया है।
कैलेंडर वर्ष 2021 की पहली तिमाही में 25 फीसदी वृद्धि
हालांकि अप्रैल महीने में इंडस्ट्री में थोड़ी दिक्कतें आई। लेकिन इससे कंपनियों के कारोबार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। मालूम हो कि महामारी के चलते कई कंपनियों ने पहली बार काम आउटसोर्स करना शुरू किया, जिससे भारतीय कंपनियों की ऑर्डर बुक बढ़ी है। कैलेंडर वर्ष 2021 की पहली तिमाही में दिसंबर तिमाही की तुलना में 25 फीसदी से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।
टीमलीज डिजिटल के बिजनेस हेडशिवा प्रसाद नंदूरी के अनुसार, हायरिंग लगातार बढ़ रही है। हमारे पास 100 से ज्यादा ग्राहक हैं, जिनका हायरिंग सेंटिमेंट काफी मजबूत है। कुछ कर्मचारी कोरोना संक्रमित हुए हैं, लेकिन बैकअप होने से कोई दिक्कत नहीं आई। चार सालों में वैश्विक आउटसोर्सिंग बाजार 29 लाख करोड़ रुपये का होगा।