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S&P Ratings: मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव से रुपये और मुद्रास्फीति पर कोई खास दबाव नहीं, एसएंडपी ने किया दावा

Tue, 24 Jun 2025 12:52 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एसएंडपी का अनुमान है कि 2025 में मुद्रास्फीति औसतन 4 प्रतिशत रहेगी, जो 2024 में 4.6 प्रतिशत होगी। एजेंसी के अनुसार 2025 के अंत तक रुपया कमजोर होकर 87.5 प्रति डॉलर पर आ जाएगा, जो 2024 के अंत तक 86.6 प्रति डॉलर होगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, मौद्रिक राहत और सामान्य मानसून को देखते हुए एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत के विकास दर अनुमान को 6.3 फीसदी से बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। साथ ही कहा, पशि्चम एशिया में मौजूदा तनाव से रुपये और महंगाई पर खास दबाव पड़ने की आशंका नहीं है।

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एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की अर्थशास्त्री विश्रुत राणा ने कहा, ऊर्जा की कीमतें अब भी पिछले साल से कम हैं, जो भारत के लिए एक बड़ी राहत है। ब्रेंट क्रूड का भाव एक साल पहले करीब 85 डॉलर प्रति बैरल था, जो मंगलवार को घटकर 69 डॉलर प्रति बैरल रह गया। क्रूड की कीमतों में गिरावट से चालू खाते से धन निकासी और घरेलू ऊर्जा कीमतों पर दबाव दोनों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। ऊर्जा की कीमतों में मामूली वृद्धि हो सकती है, लेकिन खाद्य कीमतों के बढ़ने से महंगाई पर अधिक प्रभाव पड़ेगा। कुल मिलाकर, हमें रुपये या महंगाई पर खास दबाव पड़ने के आसार नजर नहीं आते। भारत 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल और लगभग आधी प्राकृतिक गैस आयात करता है। तेल आयात का 40 फीसदी से अधिक और गैस आयात का आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।  

पहले 6.3 फीसदी का था अनुमान
 जीडीपी वृद्धि पर तनाव के असर को लेकर राणा ने कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव फिलहाल मामूली है, लेकिन लंबे समय तक संघर्ष जारी रहना दुुनिया के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
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महंगाई घटकर औसतन चार फीसदी रह जाएगी, रुपया दिसंबर अंत तक छू सकता है 87.5 का स्तर
एसएंडपी का अनुमान है कि 2025 में महंगाई औसतन चार फीसदी रहेगी, जो 2024 के 4.6 फीसदी से कम है। खुदरा महंगाई मई में घटकर छह साल से अधिक समय के निचले स्तर 2.82 फीसदी पर आ गई। वहीं, रुपया 2025 अंत तक गिरकर 87.5 का स्तर छू सकता है, जो 2024 अंत तक 86.6 प्रति डॉलर था।
राणा ने कहा, मौजूदा तनाव के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने से रुपये में अस्थिरता आ सकती है। तेल की ऊंची कीमतें भारत के चालू खाता निकासी को बढ़ाने के साथ रुपये को कमजोर कर सकती हैं।

पश्चिम एशिया में अशांति दुनिया के लिए जोखिम
एशिया-प्रशांत आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में एसएंडपी ने कहा, पश्चिम एशिया में अशांति के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ रहा है। तेल की कीमतों में दीर्घकालिक वृद्धि से धीमी वैश्विक वृद्धि, शुद्ध ऊर्जा आयातकों के चालू खातों, कीमतों और लागतों पर दबाव के जरिये एशिया-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।

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