इराक और साऊदी अरब के बाद ईरान कच्चे तेल का भारत में सबसे बड़ा सप्लायर है। प्रतिबंध लगने के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल का दाम काफी बढ़ सकते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है, जिसके चलते भारत सरकार पर बोझ बढ़ेगा।
कच्चे तेल की कीमत भी इस वक्त 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच चल रही हैं। फरवरी में भारत यात्रा पर आए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के बाद भारत ने कच्चे तेल के आयात को बढ़ा दिया था।
आप पर पड़ेगा यह असर
अगर कच्चा तेल और महंगा होता तो फिर देश में पेट्रोल-डीजल का दाम भी बढ़ जाएगा, जिससे आम लोगों के दैनिक जीवन पर काफी असर पड़ेगा। डीजल बढ़ने से जहां शहरों में दूध, फल, सब्जियां महंगी हो जाएंगी, वहीं दूसरी तरफ आना-जाना भी बढ़ जाएगा।
रुपये में कमजोरी
वहीं रुपया भी 66.87 के स्तर पर कारोबार करते हुए देखा गया। ब्रेंट क्रूड करीब 4 परसेंट चढ़कर 71 डॉलर के करीब निकलने में कामयाब रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे टूटकर 67.05 के स्तर पर आ गया। रुपये का यह स्तर बीते 15 महीने का निचला स्तर है। आखिरी बार रुपये का यह स्तर फरवरी 2017 को देखा गया था। बीते शुक्रवार को रुपया 22 पैसे टूटकर 66.86 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ था।