राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुमसार, देश में रोजगार के क्षेत्र में अच्व्छा विस्तार देखने को मिल रहा है। इसके मुताबिक, सितंबर 2017 और फरवरी 2022 के बीच 5.18 करोड़ से अधिक नए सदस्य कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना में शामिल हुए हैं।
इस साल फरवरी में आई कमी
एनएसओ की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना से जुड़ने वाले नए सदस्यों का आंकड़ा इस साल फरवरी में कम रहा। फरवरी में 9.34 लाख नए सदस्य इससे जुड़े। यह इससे बीते महीने यानी जनवरी 2022 में ईपीएफओ के सदस्य बने 11.19 लाख सदस्यों की संख्या से कम है। गौरतलब है कि एनएसओ हर महीने देश के पेरोल पर कार्यरत कर्मचारियों का डाटा पेश करता है, जो कि देश में औपचारिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है।
ईएसई सदस्यों की संख्या में गिरावट
एनएसओ ईएफपी योजना के आंकड़ों के अलावा, मासिक डेटा में कर्मचारी राज्य बीमा निगम और राष्ट्रीय पेंशन योजना के सदस्यों का आंकड़ा भी साझा करता है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2017 से फरवरी 2022 की अवधि के दौरान 6.34 करोड़ नए ग्राहक कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना से जुड़े। वहीं फरवरी 2022 के दौरान ईएसआई सदस्यों की संख्या जनवरी के 12.99 लाख की तुलना में घटकर 12.56 लाख रह गई।
एनपीएस से जुड़े 32.90 लाख सदस्य
इस अवधि में राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत 32.90 लाख नए ग्राहक शामिल हुए। बता दें कि ईएसआई 10 से अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है। जबकि, ईपीएफ 20 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है। एनपीएस भारत के किसी भी नागरिक पर लागू होता है, चाहे वह निवासी हो या अनिवासी, ऐसे व्यक्ति जिनकी आयु उनके आवेदन जमा करने की तिथि को 18 से 70 वर्ष के बीच हो इससे जुड़ सकते हैं।
सीएमआईई की चौंकाने वाली रिपोर्ट
एक ओर जहां ईपीएफओ के सब्सक्राइबर बढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत में ऐसे लोगों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिन्होंने विभिन्न कारणों से नौकरी की तलाश बंद कर दी है। इन पेशेवरों में सही तरह की नौकरी नहीं मिलने से निराशा का महौल है। एक निजी शोध संगठन सीएमआईई यानी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के नए आंकड़ों के अनुसार, 45 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने अब नौकरी की तलाश करना ही बंद कर दिया है।
श्रम भागीदारी घटकर 40 फीसदी हुई
रिपोर्ट के मुताबिक, लीगल वर्किंग उम्र के 90 करोड़ भारतीयों में से आधे से अधिक (अमेरिका और रूस की कुल आबादी के बराबर) नौकरी नहीं चाहते हैं। 2017 और 2022 के बीच, समग्र श्रम भागीदारी दर 46 फीसदी से कम होकर 40 फीसदी रह गई है। इस बीच लगभग 2.1 करोड़ श्रमिकों ने काम छोड़ा और केवल 9 फीसदी योग्य आबादी को रोजगार मिला है। CMIE के मुताबिक, भारत में अभी 90 करोड़ लोग रोजगार के योग्य हैं। नौकरी की तलाश बंद करने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।