भारतीय पूंजी बाजार के अभूतपूर्व विस्तार के बीच वित्तीय बुनियादी ढांचे पर तकनीकी खतरों का जोखिम भी तेजी से बढ़ गया है। मुंबई में आयोजित 16वें एएनएमआई अंतरराष्ट्रीय कैपिटल मार्केट कन्वेंशन में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आशीष कुमार चौहान ने इस बारे में चेताया है। उन्होंने कहा है कि एआई-संचालित साइबर जोखिम और क्वांटम कंप्यूटिंग की चुनौतियां बाजार की अखंडता सुनिश्चित करने की दिशा में कठिन परीक्षा की तरह है।
क्वांटम कंप्यूटिंग ढांचा जल्द ही मौजूदा एसएसएल क्रिप्टोग्राफिक मानकों को चुनौती देने वाला है। हमें आज ही बचाव तैयार करना होगा।" –आशीष चौहान, एमडी व सीईओ, एनएसई
पूंजी बाजार के सभी प्रतिभागियों को खतरनाक साइबर हैकिंग से बचाने के लिए एनएसई प्रमुख ने उद्योग के स्तर पर एक सहयोगी रक्षा ढांचा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) से अपील कि की वह साइबर सुरक्षा पर एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करे।
रिटेल निवेशकों और आम ट्रेडरों के दृष्टिकोण से यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब ब्रोकर्स और ट्रेडिंग मेंबर्स का सिस्टम मजबूत होता है, तो डिमैट अकाउंट में रखी प्रतिभूतियों और बैंक फंड्स पर साइबर हैकिंग या ब्रोकर्स के लेवल पर होने वाले फ्रॉड का खतरा काफी कम हो जाता है। एनएसई द्वारा प्रस्तावित यह विशेष टास्क फोर्स और एआई-सुरक्षा कवच आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी खराबी व साइबर सेंधमारी से सुरक्षा प्रदान करेगा।
सम्मेलन के दौरान चौहान ने सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे के नेतृत्व में किए गए नियामक सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने बाजार की अखंडता और निवेशकों की सुरक्षा को केंद्र में रखते हुए परिचालन संबंधी अड़चनों को कम किया है।
भारतीय पूंजी बाजार के विशाल आकार को रेखांकित करते हुए चौहान ने बताया कि देश का सूचीबद्ध बाजार पूंजीकरण ₹460 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो अब बैंकिंग प्रणाली के कुल क्रेडिट बेस और बैलेंस शीट के संयुक्त आकार से भी अधिक है।
विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय 3,000 डॉलर से बढ़कर 25,000 से 30,000 डॉलर की ओर अग्रसर है। देश के इस आर्थिक विकास में एनएसई और एएनएमआई जैसे संस्थान वित्तीय रीढ़ के रूप में कार्य करेंगे।
एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग के इस दौर में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना पूंजी बाजार के स्थायित्व के लिए अनिवार्य हो गया है। एनएसई का प्रस्तावित साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स और सेबी के निवेशक-केंद्रित सुधार यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत का वित्तीय ढांचा और रिटेल निवेशकों का भरोसा सुरक्षित रहे।