आईसीआईसीआई बैंक ने सोमवार को साफ करते हुए बताया कि सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच को 31 अक्टूबर, 2013 को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद कोई वेतन या ईएसओपी नहीं दिया है, जैसा कि कांग्रेस ने आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने इससे पहले दिन में, आरोप लगाया कि बुच, जो 2017 में एक सदस्य के रूप में सेबी में शामिल हुईं और बाद में इसकी अध्यक्ष बनीं, ने वेतन और अन्य मुआवजे के रूप में आईसीआईसीआई बैंक से 16.8 करोड़ रुपये प्राप्त किए।
बैंक ने एक बयान मेंकहा, "आईसीआईसीआई बैंक या उसकी समूह कंपनियों ने माधबी पुरी बुच को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उनके सेवानिवृत्ति लाभों के अलावा कोई वेतन या कोई ईएसओपी नहीं दिया है। उन्होंने 31 अक्टूबर, 2013 से सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना था।"
आईसीआईसीआई समूह में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्हें लागू नीतियों के अनुरूप वेतन, सेवानिवृत्ति लाभ, बोनस और ईएसओपी के रूप में मुआवजा मिला।
बैंक के अनुसार, " ईएसओपी नियमों के तहत, उसके आवंटन की तारीख से अगले कुछ वर्षों में प्राप्त होते हैं। उनके ईएसओपी अनुदान के समय मौजूद नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों सहित अन्य कर्मचारियों के पास 10 साल की अवधि तक किसी भी समय अपने ईएसओपी का उपयोग करने का विकल्प था।"
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सेबी अध्यक्ष को 2017 से आईसीआईसीआई समूह से 16.8 करोड़ रुपये मिले हैं, जो कि बाजार नियामक से उन्हें मिली आय का 5.09 गुना है।
आईसीआईसीआई बैंक ने आगे कहा कि बुच को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद किए गए सभी भुगतान आईसीआईसीआई समूह में रोजगार के चरण के दौरान उनके द्वारा अर्जित किए गए थे। इन भुगतानों में ईएसओपी और सेवानिवृत्ति लाभ शामिल हैं।
सेबी प्रमुख बुच पर अमेरिकी शोध एवं निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने पिछले महीने जारी एक रिपोर्ट में अदाणी समूह के साथ परोक्ष संबंधों के आरोप लगाए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि अदाणी समूह के वित्तीय हेराफेरी मामले में इस्तेमाल किए गए विदेशी कोष में बुच और उनके पति की भी हिस्सेदारी थी।
हालांकि, बुच ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके वित्तीय मामले खुली किताब हैं। अदाणी समूह ने भी हिंडनबर्ग के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और चुनिंदा सार्वजनिक सूचनाओं से छेड़छाड़ करने वाला बताया है।