अधिकारियों ने कहा कि जुटाए गए दस्तावेज से पता चलता है कि ज्वेलरी खरीदने वाले लोगों ने भुगतान कई हिस्सों में किया। इसका कुछ हिस्सा चेक या डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिए, जबकि बाकी हिस्सा नकद में भुगतान किया गया।
आयकर विभाग को किया गुमराह
आयकर विभाग के नोटिस के जवाब में ज्यादातर लोगों ने कहा कि उन्होंने नकद भुगतान नहीं किया है, लेकिन आयकर विभाग के जुटाए गए दस्तावेजों और नीरव मोदी की कंपनी की बिक्री दस्तावेज ने उनकी पोल खोल दी। इसलिए आयकर विभाग अब 50 से ज्यादा लोगों के आयकर रिटर्न का फिर से आकलन कर रहा है। ऐेसा 2014-15 के आकलन वर्ष से किया जा रहा है।