नया आयकर बिल गुरुवार को देश की संसद में पेश किया जा सकता है। आयकर कानूनों को सरल बनाने के मकसद से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी 2025 के अपने बजट भाषण में नया आयकर विधेयक पेश करने का एलान किया था। इस विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट की भी मंजूरी मिल चुकी है। जानकारी के अनुसार, लोकसभा में 536 धाराओं और 23 अध्यायों में तैयार 622 पन्नों वाला आयकर विधेयक 2025 अधिक व्यवस्थित और वर्तमान कानून की तुलना में सरल होगा।
वर्तमान में, पिछले वर्ष (2023-24) में अर्जित आय के लिए, कर का भुगतान निर्धारण वर्ष (2024-25) में किया जाता है। इस नये विधेयक में पिछले वर्ष और निर्धारण वर्ष की अवधारणा को हटा दिया गया है और सरलीकृत विधेयक में केवल कर वर्ष की बात कही गई है। आयकर विधेयक, 2025 में 536 धाराएं शामिल हैं, जो वर्तमान आयकर अधिनियम, 1961 के 298 धाराओं से अधिक हैं। मौजूदा कानून में 14 अनुसूचियां हैं जो नए कानून में बढ़कर 16 हो जाएंगी।
हालांकि, नए आयकर विधेयक में भी अध्यायों की संख्या 23 ही रखी गई है। जबकि पृष्ठों की संख्या काफी कम होकर 622 हो गई है, जो वर्तमान के भारी-भरकम अधिनियम का लगभग आधा है, जिसमें पिछले छह दशकों में किए गए संशोधन शामिल हैं। जब आयकर अधिनियम, 1961 लाया गया था, तो इसमें 880 पृष्ठ थे।
एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ भागीदार रजत मोहन ने कहा, ‘‘धाराओं में यह वृद्धि कर प्रशासन के लिए एक अधिक व्यवस्थित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें आधुनिक अनुपालन तंत्र, डिजिटल शासन और व्यवसायों एवं व्यक्तियों के लिए सुव्यवस्थित प्रावधान शामिल हैं। नए कानून 16 अनुसूची और 23 अध्याय हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आयकर अधिनियम, 1961 से एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इससे पहले, आयकर विभाग को विभिन्न प्रक्रियात्मक मामलों, कर योजनाओं और अनुपालन ढांचे के लिए संसद का दरवाजा खटखटाना पड़ता था। अब सीबीडीटी को स्वतंत्र रूप से ऐसी योजनाएं पेश करने, नौकरशाही में देरी कम करने और कर प्रशासन को अधिक गतिशील बनाने का अधिकार दिया गया है।’’
प्रस्तावित कानून के अनुसार, सीबीडीटी अब कर प्रशासन नियमों को लागू कर सकता है, अनुपालन उपायों को पेश कर सकता है और खंड 533 के अनुसार लगातार विधायी संशोधनों की आवश्यकता के बिना डिजिटल कर निगरानी प्रणाली को लागू कर सकता है।
विधेयक पेश किए जाने के बाद इसे विस्तृत चर्चा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजे जाने की संभावना है। प्रस्तावित कानून में कर विवादों के मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में घोषणा की थी कि नया कर विधेयक संसद के मौजूदा सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। सीतारमण ने पहली बार जुलाई 2024 के बजट में आयकर अधिनियम, 1961 की व्यापक समीक्षा की घोषणा की थी।
सीबीडीटी ने आयकर कानून में समीक्षा की देखरेख और अधिनियम को संक्षिप्त, स्पष्ट और समझने में आसान बनाने के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया था। समिति को विवादों, मुकदमों को कम करने और करदाताओं को अधिक कर निश्चितता प्रदान करने का जिम्मा सौंपा गया था। इसके अलावा, आयकर अधिनियम के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए 22 विशेष उप-समितियों की स्थापना की गई है।
नए आयकर विधेयक के लिए सार्वजनिक प्रतिक्रिया और सुझाव चार श्रेणियों में आमंत्रित किए गए थे। ये श्रेणिया थीं- भाषा का सरलीकरण, मुकदमेबाजी में कमी, अनुपालन में कमी, और अनावश्यक/अप्रचलित प्रावधान। आयकर विभाग को आयकर कानून की समीक्षा के लिए संबद्ध पक्षों से 6,500 सुझाव मिले हैं।