सरकार ग्राहकों को निरंतर गुणवत्तापूर्ण बिजली की उपलब्ध सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही एक नयी नीति स्वीकृत कर सकती है जिसमें आपूर्ति गड़बड़ होने पर ग्राहकों को वितरण कंपनी से जुर्माना दिलाने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित बिजली-दर नीति के तहत प्राकृतिक आपदा या तकनीकी कारणों को छोड़कर अगर बिजली कटौती की जाती है तो संबंधित वितरण कंपनियों को हर्जाना देना होगा और इसकी धन राशि सीधे ग्राहकों के खाते में जाएगी। जुर्माने का निर्धारण राज्य विद्युत नियामक आयोग करेगा।
इस संदर्भ में सूत्रों ने कहा कि, 'नई प्रशुल्क नीति मंत्रिमंडल को भेजी जा चुकी है और इसे जल्दी ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।' उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई में अपने बजट भाषण में एक देश एक ग्रिड का लक्ष्य हासिल करने के लिये संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया था।
सूत्रों ने बताया कि, 'प्रस्तावित प्रशुल्क नीति के तहत बिजली वितरण कंपनियों के लिये गुणवत्तापूर्ण सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। प्राकृतिक आपदा, तकनीकी कारणों, पूर्व सूचना के अनुसार रखरखाव कार्यों को छोड़कर अगर बिजली कटौती की जाती है तो संबंधित वितरण कंपनियों को जुर्माना देना होगा और यह जुर्माना सीधे ग्राहकों के खाते में जाएगा।
नई प्रशुल्क नीति में अन्य बातों के अलावा बिजली सब्सिडी सीधे ग्राहकों के खातों में देने का भी प्रावधान किया गया है। यानी अगर राज्य सरकारें सस्ती बिजली देने की घोषणा करती हैं तो उन्हें सब्सिडी वितरण कंपनियों के बजाए सीधे ग्राहकों के खातों में भेजनी होगी।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्राहक बिजली बचत के लिये प्रोत्साहित होंगे। वे अधिक बिजली बचत का प्रयास करेंगे ताकि उन्हें सब्सिडी ज्यादा-से-ज्यादा मिले।
साथ ही नई नीति में अगले तीन साल में स्मार्ट व प्रीपेड मीटर लगाने का भी प्रावधान होगा। स्मार्ट व प्रीपेड मीटर से ग्राहक मोबाइल फोन की तरह जरूरत के अनुसार रिचार्ज करा सकेंगे। इससे जहां एक तरफ बिजली बचत को प्रोत्साहन मिलेगा वहीं वितरण कंपनियों की वित्तीय सेहत भी अच्छी होगी।