आर्थिक थिंक टैंक एनसीएईआर को उम्मीद है कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्तीय वर्ष में 8.4-10.1 फीसदी की वृद्धि हासिल कर सकती है। पिछले वित्तीय वर्ष में अर्थव्यवस्था में 7.3 फीसदी का संकुचन हुआ था। नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने अर्थव्यवस्था की तिमाही समीक्षा जारी करते हुए आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मजबूत वित्तीय समर्थन पर जोर दिया।
पहली तिमाही में 11.5 फीसदी की वृद्धि
एनसीएईआर ने एक बयान में कहा कि, 'हमारा आकलन है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 11.5 फीसदी की वृद्धि होगी जबकि पूरे वित्तीय वर्ष में 8.4-10.1 फीसदी की वृद्धि होगी।'
इसमें कहा गया, 'हालांकि, उच्च वृद्धि में आधार प्रभाव की बड़ी भूमिका है। वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही इससे पिछले साल 2020-21 की पहली तिमाही में आई बड़ी गिरावट के ऊपर हासिल होगी। 2021-22 के अंत पर, जीडीपी स्थिर मूल्यों पर, 2019-20 के जितनी ही 1,46,000 अरब रुपये (146 लाख करोड़) के बराबर रहेगी।' एनसीएईआर के आकलन के मुताबिक 2020-21 में आर्थिक वृद्धि में 7.3 फीसदी का संकुचन हुआ।
पहली लहर से चार गुणा बड़ी थी दूसरी लहर
रिपोर्ट में कहा गया कि कोविड-19 की पहली लहर के मुकाबले संक्रमण मामलों की संख्या और मृत्यू के लिहाज से दूसरी लहर चार गुणा बड़ी थी। इसने पहली लहर से पहले ही बुरी तरी तरह प्रभावित अर्थव्यवस्था को और नुकसान पहुंचाया है।
एसएंडपी ने घटाया GDP अनुमान
इससे पहले एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि अनुमान को 11 फीसदी से घटाकर 9.5 फीसदी कर दिया था और चेतावनी दी कि कोविड-19 महामारी से जुड़े जोखिम आगे भी बने हुए हैं। एजेंसी ने वृद्धि के अनुमान को यह कहते हुए घटाया कि अप्रैल-मई में कोविड-19 की दूसरी लहर के चलते राज्यों द्वारा लॉकडाउन लगाए जाने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी से कमी हुई।
मूडीज ने भी घटाया GDP अनुमान
मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने वर्ष 2021 के लिए भारत के वृद्धि अनुमान को घटाकर 9.6 फीसदी कर दिया था, जो पिछले अनुमान के मुताबिक 13.9 फीसदी था। इसके साथ ही मूडीज ने कहा कि तेजी से टीकाकरण के कारण जून तिमाही में आर्थिक प्रतिबंध सीमित होंगे।