ED Action in Mumbai: ईडी ने बताया है कि एक व्यक्ति (मुंबई में) ईडी कार्यालय परिसर के आसपास अक्सर छिपा रहता था। उससे पूछताछ की गई तो पता चला कि वह बबलू सोनकर (अमर मूलचंदानी का कर्मचारी) है। उसे मूलचंदानी परिवार ने गवाहों को धमकाने और संवेदनशील जानकारी के बदले ईडी कार्यालय में काम करने वाले एक डेटा-एंट्री ऑपरेटर और एक आकस्मिक कर्मचारी को रिश्वत देने का काम सौंपा था।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को कहा कि उसने रिश्वत लेकर जांच की 'संवेदनशील' जानकारी साझा करने के आरोप में अपने मुंबई कार्यालय में अनुबंध पर कार्यरत दो कर्मचारियों और महाराष्ट्र स्थित एक सहकारी बैंक के गिरफ्तार पूर्व अध्यक्ष के 'करीबी सहयोगी' को गिरफ्तार किया है।
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यह जांच सेवा विकास सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अमर मूलचंदानी के खिलाफ धन शोधन की जांच से संबंधित है। महाराष्ट्र पुलिस ने ईडी के छापे के दौरान बाधा डालने और सबूत नष्ट करने के आरोप में मूलचंदानी और उनके परिवार के पांच सदस्यों को 27 जनवरी को गिरफ्तार किया था।
ईडी ने कहा, 'जांच के दौरान यह पाया गया कि एक व्यक्ति (मुंबई में) ईडी कार्यालय परिसर के आसपास अक्सर छिपा रहता था। उससे पूछताछ की गई तो पता चला कि वह बबलू सोनकर (अमर मूलचंदानी का कर्मचारी) है। उसे मूलचंदानी परिवार ने गवाहों को धमकाने और संवेदनशील जानकारी के बदले ईडी कार्यालय में काम करने वाले एक डेटा-एंट्री ऑपरेटर और एक आकस्मिक कर्मचारी को रिश्वत देने का काम सौंपा था।
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ईडी के अनुसार भुगतान की गई राशि वसूल कर ली गई है। एजेंसी ने कहा कि सोनकर के पास से 'आपत्तिजनक' दस्तावेज बरामद किए गए हैं और ईडी के अनुबंधित कर्मचारियों ने स्वीकार किया है कि वे उसे संवेदनशील जानकारी दे रहे थे। इसलिए उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
मूलचंदानी और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पुणे पुलिस की ओर से बैंक की शिकायतों के आधार पर दर्ज कई एफआईआर और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार की ओर से किए गए ऑडिट से संबंधित है। इसमें "बड़े पैमाने पर" धोखाधड़ी और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की बात सामने आई है, जिससे सेवा विकास सहकारी बैंक को 429 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
ईडी ने कहा, "सहकारी बैंक को किसी भी विवेकपूर्ण वित्तीय मानदंडों का पालन किए बिना एक परिवार के स्वामित्व की तरह चलाया जा रहा था। ऋण बिना किसी व्यवहार्य सुरक्षा के और बड़े पैमाने पर रिश्वत के बदले आवेदकों की योग्यता का पता लगाए बिना मंजूर किए जा रहे थे। ईडी ने कहा, "92 प्रतिशत से अधिक ऋण वाले खाते एनपीए में बदल गए और अब बैंक दिवालिया हो गया है।"