सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों यानी एमएसएमई के लिए 45 दिन में भुगतान नहीं करने से संबंधित नया नियम एक साल टल सकता है। सरकार इसे इस साल के बजाय अगले साल एक अप्रैल से लागू कर सकती है। इस नियम के तहत अगर व्यापारी एमएसएमई का भुगतान 45 दिन में नहीं करते हैं तो इस भुगतान को उनकी कमाई मानकर उन पर 30 फीसदी की दर से आयकर लगाया जाएगा। यह नियम छोटे उद्योगों के लिए अच्छा है, लेकिन कारोबारी इसका विरोध कर रहे हैं। कारोबारी संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से नियम को एक साल टालने को कहा था। एमएसएमई में पंजीकृत व्यापारियों के लिए 43 बी एच नियम लागू करने का फैसला हुआ है। 2006 में 43 बी बना था। अब इसमें एच लगा दिया गया है। इससे एमएसएमई में पंजीकृत व्यापारियों से खरीदे गए माल का भुगतान 45 दिन में करना होगा।
नियम का असर
कोई व्यापारी 45 दिन में भुगतान नहीं करता है तो भुगतान वाली रकम को कमाई मान कर 30% आयकर लगेगा। इस रकम का अगले वित्त वर्ष में भुगतान किया जाता है तो फिर उस साल में कुल आयकर की देनदारी में इसे समाहित किया जाएगा। इसमें भी पेंच यह है कि अगर किसी व्यापारी ने 10 लाख का माल खरीदा। अगर 7 लाख चुका दिया और 3 लाख बाकी रह गया। अगले साल अगर उसका कारोबार दो ही लाख का होता है तो फिर तीन लाख रुपये में से एक लाख रुपये उसके अगले साल समाहित करना होगा।
कपड़ों के कारोबार पर ज्यादा असर
व्यापारियों का कहना है कि कपड़ों का कारोबार ज्यादा प्रभावित होगा। कपड़े गोदाम से निकलकर शोरूम और उसे बेचने तक में चार महीने से ज्यादा समय लग जाते हैं। वे एमएसएमई जो पंजीकृत हैं। यह प्रावधान केवल निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं से खरीदे गए माल या सेवा पर लागू होगा। व्यापारी से खरीदे गए माल पर लागू नहीं।
नए नियम को कारोबारी समझ नहीं पाए हैं। खुदरा कारोबार पहले से प्रभावित हैं। इस नियम को एक साल के लिए बढ़ाने की मांग वित्तमंत्री से की है। -अशोक मोतियानी, अध्यक्ष, यूपी कपड़ा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल