भारत- ब्रिटेन व्यापार समझौते में मेडिकल डिवाइस के सुगम निर्यात को बढ़ावा देने के लिए म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट (एमआरए) फ्रेमवर्क को शामिल किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एमआरए, एक समझौता है, जिसके तहत दो या दो से अधिक देश या संगठन, एक-दूसरे के उत्पादों, सेवाओं, या पेशेवर योग्यता को मान्यता देने पर सहमत होते हैं।
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बैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी
यह ढांचा भारतीय निर्माताओं को ब्रिटेन में अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों जैसे चीन, ब्राजील और वियतनाम के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद करेगा। अधिकारी ने कहा कि मुक्त व्यापर समझौते में पारस्परिक मान्यता समझौता यानी एमआरए ढांचा शामिल है। यह केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) या भारतीय चिकित्सा उपकरण प्रमाणन (आईसीएमईडी) द्वारा प्रमाणित चिकित्सा उपकरणों को ब्रिटेन के बाजार में अधिक स्वतंत्र रूप से प्रवेश की अनुमति देता है।
शून्य टैरिफ पर होगा निर्यात
चिकित्सा उपकरणों और यंत्रों का ब्रिटेन को शून्य टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। पहले इन पर 2% से 6% तक का आयात शुल्क लगता था। इस फैसले से भारतीय सर्जिकल और डायग्नोस्टिक उपकरण निर्माताओं को बड़ा लाभ होगा।
ब्रिटेन के चिकित्सा उपकरण बाजार का मूल्य 69 अरब डॉलर तक बढ़ने की संभावना
अधिकारी ने बताया कि ब्रिटेन के चिकित्सा उपकरण बाजार का मूल्य 2024 में 32 अरब डॉलर था। यह 2035 तक 69 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 7.19 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ रहा है। यह भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर का संकेत देता है।
दोनों देशों के लिए होगा फायदेमंद
सीडीएससीओ और एमएचआरए (मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी) के बीच एक द्विपक्षीय विनियामक सहयोग ढांचा भी विकसित किया जाएगा, जो एमआरए का रूप ले सकता है। अधिकारी ने आगे कहा कि समझौते में संयुक्त निरीक्षण, डेटा साझाकरण, तकनीकी दस्तावेजीकरण में सामंज्य के साथ दोनों देशों के नियामकों के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रावधान शामिल होंगे। इससे एक-दूसरे के नियामक ढांचे में विश्वास पैदा करने में मदद मिलेगी।