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RBI MPC Meet: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने की बैठक, लगातार बढ़ रही महंगाई पर सरकार को देना है जवाब

Thu, 03 Nov 2022 01:53 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

RBI MPC Meet Today: इस वर्ष जनवरी से ही मुद्रास्फीति लगातार छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। सितंबर में भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 7.4 प्रतिशत पर दर्ज की गई। आरबीआई के प्रावधानों के तहत केंद्रीय बैंक को इस पर सरकार को जवाब देना है।
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Reserve Bank of India - फोटो : Social Media
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विस्तार
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रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति समिति ने गुरुवार को मुद्रास्फीति पर सरकार को जवाब देने के लिए तैयार की गई रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए गुरुवार को बैठक की है। सूत्राें के अनुसार सरकार के लिए  एक रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए बैठक की गई है।

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लगातार तीन तिमाहियों तक महंगाई रोकने में विफल रहने पर आरबीआई को देना है जवाब

Why RBI Hike Repo Rate During High Inflation - फोटो : Istock

बता दें कि इस वर्ष जनवरी से लगातार तीन तिमाहियों तक खुदरा मुद्रास्फीति को छह प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रखने में आरबीआई क्यों विफल रहा? इस बात से संबंधित एक रिपोर्ट केंद्रीय बैंक को सरकार को सौंपनी है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के अनुसार यह रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की जाएगी। बता दें कि छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास करते हैं।

ये लोग हैं आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी में शामिल

rbi new - फोटो : istock

एमपीसी के अन्य सदस्यों में दिल्ली के नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के मानद वरिष्ठ सलाहकार शशांक भिड़े, मुंबई के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च में एमेरिटस प्रोफेसर आशिमा गोयल और अहमदाबाद के भारतीय प्रबंधन संस्थान के प्रोफेसर जयंत आर वर्मा शामिल हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा और आरबीआई के कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन भी इसके अन्य सदस्यों में शामिल हैं।

छह वर्ष पूर्व हुआ था मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी का गठन

RBI UPI System - फोटो : Istock
छह साल पहले मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का गठन होने के बाद पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लगातार नौ महीनों तक मुद्रास्फीति को निर्धारित दायरे में नहीं रख पाने पर एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगा। वर्ष 2016 में मौद्रिक नीति निर्धारण के एक व्यवस्थित ढांचे के रूप में एमपीसी का गठन किया गया था। उसके बाद से एमपीसी ही नीतिगत ब्याज दरों के बारे में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई बनी हुई है। एमपीसी ढांचे के तहत सरकार ने आरबीआई को यह जिम्मेदारी सौंपी थी कि मुद्रास्फीति चार प्रतिशत (दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ) से नीचे बनी रहे।

जनवरी महीने से ही मुद्रास्फीति की दर छह प्रतिशत के ऊपर

High Inflation - फोटो : Istock
हालांकि, इस साल जनवरी से ही मुद्रास्फीति लगातार छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। सितंबर में भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 7.4 प्रतिशत पर दर्ज की गई। इसका मतलब है कि लगातार नौ महीनों से मुद्रास्फीति छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को अपनी नीतियों का बचाव करते कहा था कि अगर समय से पहले ब्याज दरों को सख्त करना शुरू कर दिया होता तो अर्थव्यवस्था में वृद्धि नीचे की ओर मुड़ जाती। यह स्वीकार करते हुए कि बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण केंद्रीय बैंक अपने प्राथमिक लक्ष्य से चूक गया है, दास ने कहा कि ‘प्रतितथ्यात्मक’ पहलू की भी सराहना करने की आवश्यकता है।
 
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आरबीआई गवर्नर ने कहा था- अर्थव्यवस्था को देखते हुए हमने नहीं अपनाया आक्रामक रुख 

आरबीआई - फोटो : अमर उजाला
आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘‘अगर हमने जल्दी सख्त या आक्रामक रुख अपनाया होता तो यह निर्णय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महंगा पड़ता। यह इस देश के नागरिकों के लिए भी महंगा होता और हमें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती।’’ सरकार ने 31 मार्च, 2021 को जारी एक अधिसूचना में कहा था कि मार्च, 2026 तक आरबीआई को मुद्रास्फीति चार प्रतिशत (दो प्रतिशत अधिक या दो प्रतिशत कम) के भीतर रखना होगी। इस तरह सरकार ने पांच वर्षों के लिए मुद्रास्फीति को अधिकतम छह प्रतिशत तक रखने का दायित्व आरबीआई को सौंपा था।
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