आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने भारत को सुझाव दिया है कि उसे गुणवत्तापूर्ण नौकरी और आय में इजाफा करने के लिए और सुधारों की जरूरत है। संगठन ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार की ओर से पूर्व में उठाए गए आर्थिक सुधार के कदमों का असर दिखने लगा है।
ओईसीडी ने कहा है कि 2019-20 में भारत की विकास दर 5.8 फीसदी रहेगी। संगठन ने कहा कि उच्च स्तर पर वृद्धि को बहाल करना नौकरियों के सृजन के लिए जरूरी है । साथ ही निवेश व निर्यात में तेजी लाने के लिए ढांचागत सुधारों को बढ़ाना होगा। इससे 2020-21 में भारत की विकास दर 6.2 फीसदी और 2021-22 में 6.4 फीसदी पहुंच सकती है।
वित्त मंत्रालय के दो पूर्व अधिकारियों ने अपनी किताब में कहा है कि भारत को मध्य वर्ग की आय बढ़ाने के लिए सांस्थानिक ढांचे की जरूरत है, क्योंकि भारत मध्य आय की उभरती अर्थव्यवस्था वाला देश है। सर्विस ऑफ द रिपब्लिक किताब में विजय केलकर और अजय शाह ने लिखा है कि 30 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ भारत अब मध्य आय की ओर बढ़ रहा है। हमने 1991 से 2011 के बीच तेज वृद्धि दर देखी है। हालांकि, अब विकास का यह फॉर्मूला पुराना हो गया है और सरकार को इस पर नए सिरे से विचार करना होगा। मध्य वर्ग की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर देना होगा। पेट्रोलियम सचिव, वित्त सचिव और 13वें वित्त आयोग के चेयरमैन रहे केलकर ने कहा कि अभी हम कृषि क्षेत्र की गिरावट से जूझ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि राज्य सरकारें भंडारण, वायदा बाजार, घरेलू और वैश्विक कारोबार में कमजोर होती जा रही हैं।