मिल सकता था मुफ्त राशन
सरकार के पास अनाज के भंडार भरे हैं यदि सरकार सभी को राशन की दुकानों से सस्ता राशन देने की घोषणा करती तो मध्यवर्ग के कम से कम आधे परिवार तो इसका लाभ अवश्य उठाते इससे उन्हें बहुत राहत मिलती। - देवेंद्र शर्मा, कृषि और खाद्य विशेषज्ञ
कॉरपोरेट से गरीब तक सभी को राहत
सरकार ने न्यूनतम आयु वर्ग वाली 67 फीसदी आबादी यानी 80 करोड़ लोगों को अप्रैल से नवंबर तक मुफ्त राशन देने की घोषणा की है। 3 महीने तक रसोई गैस भी मुफ्त मिला जनधन खातों में 500 रुपए प्रति माह अलग से मिल रहा। किसानों को भी सालाना 6000 रुपए मिल रहे हैं। कॉरपोरेट के लिए आसान कर्ज सहित कई दूसरे उपाय घोषित किए गए। बावजूद इसके मध्य वर्ग में आने वाले लगभग 30 करोड़ लोगों के लिए सरकार के पास कोई राहत नहीं है।
पश्चिमी देशों ने दी सबसे बड़ी मदद
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर सूरजीत दास कहते हैं कि ब्रिटेन सहित यूरोप के अधिकतर देशों में सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों के वेतन की 50 से 80 फ़ीसदी राशि निजी कंपनियों को दी। इससे वहां लोगों की नौकरियां बच गई और उन्हें वेतन कटौती का भी सामना नहीं करना पड़ा। भारत में सिर्फ 15,000 रुपए महीने से कम वेतन वालों की भविष्य निधि का भुगतान ही सरकार ने किया है।