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Meta: एंटी ट्रस्ट मामले में मेटा के खिलाफ सुनवाई आज से, केस हारे तो बेचना पड़ सकता है इंस्टाग्राम और वाट्सएप

Mon, 14 Apr 2025 05:33 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Meta Antitrust Case: अमेरिकी सरकार की एक जांच एजेंसी का आरोप है कि मेटा की कंपनी फेसबुक ने 2012 में इंस्टाग्राम और 2014 में व्हाट्सएप को खरीदकर बाजार से प्रतिस्पर्धा को खत्म कर दिया और एकाधिकार बना लिया। इस मामले में सोमवार से सुनवाई होनी है। अगर मेटा यह मुकदमा हारती है तो उसे इंस्ट्राग्राम और वाट्सएप जैसी कंपनियों से अलग होना पड़ सकता है। क्या है पूरा मामला आइए समझते हैं।
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मार्क जुकरबर्ग, मेटा के सीईओ - फोटो : ANI
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विस्तार
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मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की परेशानी आने वाले दिनों में बढ़ सकती है। एंटीट्रस्ट मामले में कंपनी के खिलाफ सोमवार से ट्रायल शुरू होनी है। इस मामले अमेरिकी सरकार की एक जांच एजेंसी ने आरोप लगाया गया है कि जुकरबर्ग की कंपनी ने वर्षों से प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन कर अवैध रूप से "सोशल नेटवर्किंग एकाधिकार" हासिल किया है।दरअसल, अमेरिकी प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता निगरानी संस्था (एफटीसी) का आरोप है कि मेटा ने, जिसके पास फेसबुक का स्वामित्व है ने 2012 में इंस्टाग्राम  और 2014 में व्हाट्सएप को खरीदकर बाजार से प्रतिस्पर्धा को खत्म कर दिया और एकाधिकार बना लिया।

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केस हारे तो जुकरबर्ग के हाथ से जा सकती है इंस्टाग्राम और वाट्सएप

इस मामले में यदि न्यायाधीश एफटीसी के पक्ष में फैसला सुनाते हैं, तो मेटा को इंस्टाग्राम और वाट्सएप को बेचकर खुद को इन कंपनियों से अलग होने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इस मामले में तकनीकी जगत की अन्य दिग्गज कंपनियों को भी नोटिस जारी किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे या नहीं? यह सवाल सिलिकन वैली में हर किसी की जुबान पर है। इस मामले की जांच कर रही एजेंसी ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्र एजेंसी के रूप में काम करती रही है। हालांकि, ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान जिस तरह से प्रचलित मानदंडों में बदलाव किया है उसे देखते हुए अमेरिका में पक्षपात और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच पर व्यापक चिंता जताई जा रही है।

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जुकरबर्ग पर आरोप- मामले को सुलझाने के लिए मेटा फाउंडर ने ट्रंप से बढ़ाई नजदीकी

इसी समय, जुकरबर्ग ट्रंप के रात्रिभोज में शामिल होकर और मेटा में कई बदलाव कर ट्रम्प के साथ निकटता दिखाने की हर संभव कोशिश की है। जनवरी में ट्रंप की दोबारा ताजपोशी के बाद जुकरबर्ग ने मेटा कर्मचारियों से कहा कि "अब हमारे पास अमेरिकी के साथ एक उत्पादक साझेदारी करने का मौका है और हम इसका फायदा उठाने जा रहे हैं।" जुकरबर्ग को हाल ही में 2 अप्रैल को व्हाइट हाउस में देखा गया। उसी दिन, द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि वह ट्रम्प से एफटीसी मामले को सुलझाने के लिए बातचीत कर सकते हैं।

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पूर्व श्रम सचिव रॉबर्ट रीच, जो ट्रंप और जुकरबर्ग दोनों के कट्टर आलोचक हैं, ने एक्स पर लिखा, "याद है कि कैसे मार्क जुकरबर्ग ने ट्रम्प के साथ घुलना-मिलना शुरू कर दिया? मेटा ने ट्रंप को 10 लाख डॉलर का दान दिया था। खैर, अब जुकरबर्ग इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। कथित तौर पर मेटा के खिलाफ एफटीसी के एंटीट्रस्ट मुकदमे को निपटाने के लिए वे ट्रंस से पैरवी करवाने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि आप हमेशा पैसे के पीछे भागते हैं।"

डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही सामने आया था मामला

मेटा के खिलाफ यह मामला दरअसल ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही सामने आया था। ट्रंप की ओर से नियुक्त एफटीसी आयुक्तों ने लगभग हर राज्य अटॉर्नी जनरल कार्यालय के साथ मिलकर मेटा के इंस्टाग्राम और वाट्सएप के पिछले अधिग्रहणों की जांच की थी और दिसंबर 2020 में मुकदमा दायर किया। छह महीने बाद मुकदमा खारिज कर दिया गया लेकिन उस समय राष्ट्रपति जो बाइडन की ओर से नियुक्त लोगों ने मेटा के खिलाफ फिर से मामला तैयार किया। इस मामले में न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने मुकदमा खारिज करवाने के लिए के मेटा के प्रयासों को अस्वीकार कर दिया था।

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