वैश्विक अनिश्चितता से मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार भारत की उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति जुलाई में 1.61 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त 2025 में 2.07 प्रतिशत हो गई, जो दस महीनों में पहली मासिक वृद्धि है। इस वृद्धि के बावजूद मुद्रास्फीति आरबीआई के चार प्रतिशत के लक्ष्य के नीचे और उसके निर्धारित स्तर के भीतर बनी हुई है, जिसमें खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें इस वृद्धि के कारण बनी हुई है। हाल ही में जीएसटी कर में सुधार से रिटेल कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। इससे निकट भविष्य में मुद्रास्फीति में संभावित रूप से कमी आ सकती है। हालांकि अर्थशास्त्री आगाह करते हैं कि वैश्विक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू मांग के दबाव जैसे कारणों से आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च का कहना है भारत की अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में उम्मीदों से अधिक साल दर साल 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की। इस वृद्धि को काफी हद तक सरकारी खर्च का समर्थन प्राप्त है। हालांकि निजी निवेश अभी भी धीमा बना हुआ है। बाहरी मोर्चे पर अमेरिका व्यापार शुल्क (टैरिफ ) और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियां भविष्य की विकास संभावनाओं पर भारी पड़ सकती हैं।
तरलता यानी लिक्विडिटी प्रबंधन और अग्रिम मार्गदर्शन सितंबर 2025 में सीआरआर में कमी सहित आरबीआई के तरलता हस्तक्षेपों का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इन प्रयासों के बावजूद उधार लेने की लागत अपेक्षाकृत उच्च बनी हुई है। विशेषकर केंद्र और राज्य सरकारों के लिए, केंद्रीय बैंक से अपने अग्रिम मार्गदर्शन में एक तटस्थ रुख अपनाने की उम्मीद है, जो मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए विकास को बनाए रखने के लिए आवश्यकता को संतुलित करता है।