देश में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि जनवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। नए ऑर्डर्स से वृद्धि दर को बढ़ावा मिला। गुरुवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण से यह जानकारी मिली है। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) दिसंबर में 18 महीने के निचले स्तर 54.9 से बढ़कर जनवरी में 56.5 हो गया।
नवीनतम आंकड़े पिछले सितंबर के बाद से क्षेत्र में मजबूत सुधार को रेखांकित करते हैं। पीएमआई की भाषा में 50 से ऊपर का मतलब विस्तार से है। वहीं 50 से कम का आंकड़ा संकुचन को दर्शाता है। एचएसबीसी के अर्थशास्त्री इनेस लैम ने कहा, ‘‘भारत के विनिर्माण पीएमआई से जनवरी में विनिर्माण गतिविधि में तेजी की बात सामने आई है। उत्पादन मांग मजबूत है। घरेलू ठेके, निर्यात ठेकों की तुलना में तेज से बढ़ रहे हैं।’’
सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय सामान उत्पादकों को दिए गए नए ठेके जनवरी में तेज गति से बढ़े, और यह चार महीनों में सबसे मजबूत वृद्धि है। विपणन प्रयासों और मांग में उछाल से वृद्धि को बढ़ावा मिला।अंतरराष्ट्रीय बिक्री भी तेज गति से बढ़ी। सामान उत्पादकों ने अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका में फैले ग्राहकों से मजबूत मांग की जानकारी दी। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय ठेके में विस्तार की दर पिछले अक्टूबर के बाद से सबसे तेज रही।’’ एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 विनिर्माताओं की एक समिति को भेजी गई प्रश्नावली से मिले जवाबों से संकलित किया।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने जनवरी की बैठक में प्रमुख ब्याज दर को 5.25-5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने फैसला किया है। अमेरिकी मौद्रिक नीति समिति ने अपने बयान में कहा कि हाल के संकेतकों से पता चलता है कि आर्थिक गतिविधि ठोस गति से बढ़ रही है। पिछले साल की शुरुआत से नौकरियों में कमी आई है लेकिन यह मजबूत बना हुआ है, और बेरोजगारी दर कम बनी हुई है। पिछले एक साल में मुद्रास्फीति कम हुई है लेकिन यह अब भी उच्च स्तर पर है।
दो हजार रुपये के बैंक नोटों का 97.5 फीसदी वापस आ गया: आरबीआई
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को कहा दो हजार रुपये के बैंट नोटों में करीब 97.5 फीसदी बैंकिंग प्रणाली में वापस आ चुके हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा, चलन से बाहर किए गए नोटों में से केवल 8,897 करोड़ रुपये ही जनता के पास बचे हैं। आरबीआई ने पिछले साल 19 मई को दो हजार रुपये के बैंक नोटों को प्रचलन से वापस लेने की घोषणा की थी।