दो-तिहाई डिजिटल पेमेंट
ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल पेमेंट अब सामान्य ट्रेंड बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। लगभग 66 फीसदी उपभक्ताओं ने कहा है कि वे खरीद के लिए ऑनलाइन माध्यम या डिजिटल माध्यम से भुगतान करेंगे। यह सर्वे देश के 396 जिलों में 1.15 लाख उपभोक्ताओं और 38 हजार घरों में लोगों से बातचीत कर तैयार किया गया है। इसमें 67 फीसदी पुरुष और 37 फीसदी महिलाएं शामिल थीं।
हर मानक दिखा रहे अर्थव्यवस्था में तेजी
आर्थिक विशेषज्ञ और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि अर्थव्यवस्था के हर बड़े मानक सुधार का संकेत दे रहे हैं। अर्थव्यवस्था के अग्रिम सेक्टर के उद्योगों में 11.2 फीसदी की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी वृद्धि हो रही है। केंद्र का जीएसटी कलेक्शन हर महीने एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। 81 फीसदी कामकाजी श्रमिकों का वेतन कोरोना पूर्व काल की स्थिति में आ गया है। बजटीय घाटा लगातार कम हो रहा है। ये संकेत बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में आ रही है।
भाजपा नेता ने कहा कि अब तक खुदरा सामानों की बिक्री, मांग में कमी और रोजगार के मोर्चे पर अपेक्षित सुधार न होना चिंता का कारण बना हुआ था। लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की है और निर्माण कार्यों में तेजी आने से रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो रही है। इससे शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता में सुधार आया है।
वहीं, कृषि उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी और फसलों की खरीद से किसानों के हाथ में पैसा पहुंचा है। केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं से भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक क्षमता सुधरी है। इन सब प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है कि लोगों की खरीद क्षमता में सुधार आ रहा है और बाजार में मांग में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि आगे आने वाले दिनों में यह गति बनी रहने की उम्मीद है।
भरोसेमंद नहीं आंकड़े
दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर डॉ. आभास कुमार ने अमर उजाला से कहा कि इन आंकड़ों पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता। तकनीकी जानकारी न रखने वाला व्यक्ति भी बाजार में निकलकर देख सकता है कि लोगों के कामकाज में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है और दुकानों में खरीद अभी कोरोना पूर्व के काल में नहीं आया है। ऐसे में अर्थव्यवस्था के बहुत तेज सुधार के दावे सही नहीं लगते।
प्रो. आभास कुमार के अनुसार, ज्यादातर मानकों के मामले में सरकार कोरोना काल से आज के आंकड़ों की तुलना कर अर्थव्यवस्था के बेहतर होने की बात कह रही है जो भ्रामक सूचना है। कोरोना काल में देश की अर्थव्यवस्था एक तिहाई कामकाज के भरोसे चल रही थी। दो तिहाई कामकाज पूरी तरह से ठप था और अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड गिरावट हुई थी। इसलिए उस स्थिति से तुलना कर आज बेहतरी का दावा करना उचित नहीं है।
हालांकि, यह सही है कि केंद्र-राज्य सरकारों ने अपने-अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते जारी किए हैं, इससे इनकी खरीद क्षमता बढ़ी है और ये आने वाले त्योहारी सीजन में खरीदारी कर बाजार को एक गति देने का काम कर सकते हैं। लेकिन पूरे देश की आबादी में बेहद सीमित हिस्सा रखने वाला सरकारी नौकरी पेशा वर्ग इतनी बड़ी क्षमता नहीं रखता, जिससे उसके आधार पर पूरे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार आने का दावा किया जा सके।
बाजार के कामकाज में सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी यह 50-60 फीसदी तक ही वापस आया है। बेरोजगारी अभी भी चिंताजनक स्तर पर बनी हुई है और हर चीजों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि आम उपभोक्ताओं की कमर तोड़ रही है। ऐसे में अर्थव्यवस्था ठीक हो गई है और लोगों की क्रय क्षमता वापस आ गई है, इस मनोवैज्ञानिक स्तर तक पहुंचने के लिए अभी इंतजार करना होगा।