भले ही युवाओं (मिलेनियल्स) के दम पर बीते दो साल से कर्ज की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन भविष्य में ये ऋणदाताओं के चिंता का सबब बन सकते हैं। एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उनमें से ज्यादातर लोग जोखिम भरे असुरक्षित कर्ज ले रहे हैं। मिलेनियल्स में ऐसे लोग आते हैं, जिनका जन्म वर्ष 1980 के बाद हुआ हो।
क्रेडिट ब्यूरो ट्रांसयूनियन-सिबिल ने मंगलवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि नए कर्ज लेने वाले मिलेनियल्स में 58 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि गैर मिलेनियल श्रेणी में महज 14 फीसदी की वृद्धि रही।
अपने कजों में बढ़ोतरी के लिए ऋणदाताओं की निर्भरता काफी हद तक खुदरा खंड पर बढ़ती जा रही है क्योंकि उनकी गुणवत्ता कॉरपोरेट खंड से बेहतर है, जो पहले से ही बहीखातों पर बोझ होने के कारण निवेश से संकोच कर रहे हैं।
हालांकि मिलेनियल खंड के वित्तीय व्यवहार, विशेषकर ज्यादा कर्ज लेने और राष्ट्रीय बचत दर में गिरावट को लेकर चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं। सिबिल के अध्ययन के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन और उपभोक्ता सामान के लिए कर्ज में मिलेनियल्स की 72 फीसदी हिस्सेदारी को देखते हुए इस खंड में खपत पर केंद्रित आदतों में बढ़ोतरी जाहिर होती है। इसकी तुलना में वाहन कर्ज जैसे सुरक्षित कर्ज में मिलेनियल्स की हिस्सेदारी सिर्फ 9 फीसदी है।
हालांकि ब्यूरो रिपोर्ट ऐसी चिंताओं को कम भी करती है, जिसमें कहा गया है कि मिलेनियल्स अपने क्रेडिट स्कोर को लेकर खासे सतर्क हैं, क्योंकि वे इसकी खुद निगरानी करते हैं और उनका स्कोर 900 में से औसतन 740 है।