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LIC IPO: देश का सबसे बड़ा आईपीओ आने में हो सकती है देरी, जानें सरकार की ओर से क्यों मिल रहे ऐसे संकेत

Mon, 14 Mar 2022 11:56 AM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के आईपीओ का निवेशक बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों को झटका लग सकता है। दरअसल, रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते बबने हालात के कारण शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि एलआईसी आईपओ के इस वित्त वर्ष पेश होने की संभावना नहीं है। 
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एलआईसी आईपीओ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के आईपीओ का निवेशक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन , एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनका ये इंतजार लंबा हो सकता है। दरअसल सरकार की ओर से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इसके इस वित्त वर्ष पेश होने की संभावना नहीं है। रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर इसे टाला जा सकता है। 

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रूस और यूक्रेन युद्ध् का असर
लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन के मेगा आईपीओ पर रूस-यूक्रेन संकट के कारण दबाव नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच युद्ध के चलते बाजार में मची उथल-पुथल के कारण सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। हालांकि सरकार ने इसे पेश करने की पूरी तैयारी कर ली है लेकिन यूक्रेन हमले से निवेशकों की धारणाओं पर जो विपरीत असर हुआ है और वे सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि बीते कुछ समय से विदेशी निवेशक लगातार शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। ऐसे में सरकार भी हालात बदलने का इंतजार कर रही है।

सेबी की ओर से मिल चुकी मंजूरी
गौरतलब है कि एलआईसी के इस मेगा आईपीओ की सफलता के लिए पिछले दिनों हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए एफडीआई संबंधी नियम में बदलाव किया गया था। इसके तहत एलआईसी के आईपीओ में 20 फीसदी फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा 13 फरवरी को बाजार नियामक के पास डीआरएचपी जमा किए जाने के बाद हाल ही में सेबी ने आईपीओ को मंजूरी दी है। सूत्रों के मुताबिक, 12 मई तक इस डीआरएचपी के आधार पर आईपीओ लाया जा सकता है। अगर 12 मई से देरी होती है तो फिर नए सिरे से एंबेडेड वैल्यु समेत कई अहम काम करने होंगे जिसमें फिर से समय लग सकता है।
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सरकार ने निर्धारित की थी ये डेडलाइन 
बता दें कि पहले सरकार की योजना एलआईसी के आईपीओ को 31 मार्च तक पेश करने की थी। इस आईपीओ के जरिए सरकार 78 हजार करोड़ के विनिवेश के लक्ष्य को हासिल करना चाहती है। लेकिन जो हालात बाजार में चल रहे हैं उन्हें देख ये पूरा होता नहीं दिख रहा है। सरकार की नजर इस समय बाजार के वोलाटिलिटी इंडेक्स पर है जो 25 के करीब है। रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण इस इंडेक्स में तेजी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जब तक यह इंडेक्स घटकर 15 पर नहीं आ जाता है, सरकार आईपीओ के बारे में विचार नहीं करना चाहेगी। एलआईसी ने खुदरा निवेशकों के लिए 35 फीसदी हिस्सा आरक्षित रखा है। अगर बाजार में वोलाटिलिटी ज्यादा रहेगी तो रिटेल इन्वेस्टर्स इससे दूरी बना सकते हैं। 

10 फीसदी हिस्सा पॉलिसीधारकों के लिए
दस्तावेजों के अनुसार, एलआई के आईपीओ का एक हिस्सा एंकर निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। इसके अलावा एलआईसी आईपीओ इश्यू साइज का 10 फीसदी तक पॉलिसीधारकों के लिए और पांच फीसदी कर्मचारियों के लिए आरक्षित होगा। बता दें कि एलआईसी का ये आईपीओ देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। 

पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आईपीओ
एलआईसी का ये आईपीओ अब तक सबसे बड़ा आईपीओ होगा। सेबी में सौंपे गए डीआरएपी के अनुसार, एलआईसी का इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। इसमें सरकार अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी के अंतर्गत 31.6 करोड़ शेयर जारी करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिसाब से कंपनी की एम्बेडेड वैल्यू 5.4 लाख करोड़ रुपये होगी। अमूमन किसी बीमा कंपनी का मार्केट कैप इस वैल्यू का चार गुना होता है। इस हिसाब से देखें तो एलआईसी की मार्केट वैल्यू 288 अरब डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपये होगी और एलआईसी देश की सबसे बड़ी मूल्यवान कंपनी बन जाएगी। 

20 फीसदी एफडीआई को मंजूरी
गौरतलब है कि बीते दिनों हुई कैबिनेट की बैठक में एलआईसी आईपीओ को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया था। दरअसल, आईपीओ-बाउंड एलआईसी में एफडीआई की अनुमति दे दी गई थी। बैठक में एलआईसी में ऑटोमेटिक रूट से 20 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी पर मुहर लगाई गई थी। इस फैसले के बाद एलआई के प्रस्तावित आईपीओ में विदेशी निवेश का रास्ता खुल गया है।

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