बीमा कंपनी की हिस्सेदारी पर चिंता
एंजल वन ने कहा है कि एलआईसी का वैल्यूएशन एंबेडड वैल्यू की तुलना में केवल 1.1 गुना है। निजी कंपनियां जो सूचीबद्ध हैं, वे 2.5 से 4.3 गुना पर कारोबार कर रही हैं। हालांकि, व्यक्तिगत बीमा कारोबार में एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी जरूर चिंता का विषय है। इसके बावजूद निवेशकों को एलआईसी के आईपीओ में पैसा जरूर लगाना चाहिए।
निजी कंपनियों की तुलना में सस्ता भाव
रिलायंस सिक्योरिटीज ने कहा कि यह आईपीओ सूचीबद्ध निजी बीमा कंपनियों से कम भाव पर है। इसके पास बीमा के विविधीकृत फोलियो हैं। 14 लाख एजेंट के साथ इसका वित्तीय रिकॉर्ड अच्छा है। इसलिए इसे खरीदना चाहिए। ब्रोकरेज हाउस निर्मल बंग सिक्योरिटीज का भी कहना है कि निवेशक शेयर खरीद सकते हैं। इसने कहा, कंपनी नए उत्पाद पेश करेगी तो इसकी बाजार हिस्सेदारी और मजबूत होगी।
एलआईसी के कारोबार पर एक नजर
एलआईसी का नकारात्मक पहलू यह है कि लगातार 8 वर्षों से इसकी बाजार हिस्सेदारी घट रही है। यह 72 फीसदी से गिरकर 64 फीसदी पर आ गया है। भारत में बीमा उद्योग की विकास दर 17 फीसदी है, जबकि एलआईसी की विकास दर 7 फीसदी है।
हालांकि, ग्रे मार्केट में इसका प्रीमियम 85 रुपये पर है। इसका मतलब है कि 949 रुपये का शेयर 1,034 रुपये पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले एंकर निवेशकों के लिए 2 मई को खुला यह आईपीओ पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ था। इसमें देश-विदेश के 20 एंकर निवेशकों ने हिस्सा लिया था।