ओडिशा सरकार ने राज्य के औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को यूएई स्थित इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी समूह) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये) के निवेश वाली एक मेगा एकीकृत एल्युमीनियम परियोजना के लिए है। एमओयू पर हस्ताक्षर भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह के दौरान हुए। इस समझौते में राज्य की औद्योगिक प्रोत्साहन एजेंसी, इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ ओडिशा लिमिटेड (आईपीआईसीओएल), और यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी समूह) शामिल हैं।
औद्योगिक विकास पर राज्य सरकार का विजन क्या?
मुख्यमंत्री ने हरित धातुओं और पर्यावरणीय रूप से सतत औद्योगिक विकास की बढ़ती वैश्विक मांग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ओडिशा इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित परियोजना इस उद्देश्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने राज्य के दीर्घकालिक विकास विजन को दोहराते हुए कहा कि यह निवेश 'समृद्ध ओडिशा 2036' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों के अनुरूप है। सरकार 2036 तक ओडिशा को भारत के अग्रणी औद्योगिक गंतव्यों में से एक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत-UAE आर्थिक संबंधों पर आईएचसी के अधिकारी क्या बोले?
एल्युमीनियम परियोजना के अलावा, ओडिशा और आईएचसी समूह उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग करेंगे। इनमें अनुसंधान और विकास (आर एंड डी), धातु विज्ञान, डिजिटल प्रणाली और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) शामिल हैं। माझी ने निवेशकों को भूमि, पानी, बिजली, लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा और समयबद्ध वैधानिक मंजूरी सहित राज्य के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। इस अवसर पर आईएचसी के मुख्य रणनीतिक अधिकारी पीटर अब्राहम ने कहा कि यह समझौता भारत-यूएई आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय है। उन्होंने इस साझेदारी को ओडिशा के सतत विकास के लिए एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता बताया।
ओडिशा में नए एल्युमीनियम प्लांट पर अदाणी ग्रुप ने क्या कहा?
भुवनेश्वर में आयोजित एमओयू हस्ताक्षर समारोह में, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अदाणी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि अदाणी ग्रुप का यह प्रोजेक्ट असल में ग्लोबल स्तर पर उसकी महत्वाकांक्षा को दिखाता है। 11.5 अरब डॉलर (लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपए) के प्रस्तावित निवेश के साथ, यह दुनिया भर में एल्युमीनियम इकोसिस्टम में किए गए सबसे अहम निवेशों में से एक है। इसकी असली अहमियत सिर्फ निवेश की रकम में नहीं है, बल्कि इसके असर की गहराई में है। करण अदाणी ने कहा, हम यहां सिर्फ ऐतिहासिक एमओयू के गवाह बनने के लिए नहीं, बल्कि ओडिशा के लिए एक नए आर्थिक अध्याय की शुरुआत करने के लिए इकट्ठा हुए हैं, जो भारत की विकास यात्रा को आकार देगा और उसे गति देगा। इसे लगभग 4,000 मेगावाट की कैप्टिव पावर क्षमता और लगभग 400 मेगावाट के ग्रीन एनर्जी का सपोर्ट भी मिलेगा।