सितंबर में सरकार तीन नए कृषि विधेयक लाई थी, जिन पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद वे कानून बन चुके हैं। लेकिन किसानों को ये कानून रास नहीं आ रहे हैं क्योंकि उनका कहना है कि इनसे किसानों को नुकसान और निजी खरीदारों और कॉरपोरेट घरानों को फायदा होगा। इन्हीं में से एक है कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून, 2020, जिसका उद्देश्य अनुबंध खेती यानी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की इजाजत देना है। आइए जानते हैं कि क्या है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और क्यों इसका विरोध कर रहे हैं किसान?
क्या है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग?
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत किसान अपनी जमीन पर खेती तो करता है, लेकिन अपने लिए नहीं बल्कि किसी और के लिए। इसमें किसान को पैसा नहीं खर्च करना पड़ता और कोई कंपनी या फिर कोई आदमी किसान के साथ अनुबंध करता है कि किसान द्वारा उगाई गई फसल विशेष को कॉन्ट्रैक्टर एक तय दाम में खरीदेगा। इसमें खाद और बीज से लेकर सिंचाई और मजदूरी सब खर्च कॉन्ट्रैक्टर के ही होते हैं।