ढोलकिया आगे बताते हैं कि कारोबार आगे बढ़ाना था तो कंपनी बनाना और उसकी मार्केटिंग करना भी जरूरी था, जिसके लिए वह मुबई पहुंच गए। उनके अनुसार मुबई में उन्होंने एक बिजनेस सलाहकार की सेवा ली और फिर कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराके मार्केटिंग का काम शुरू किया।
ढोलकिया की हरे कृष्णा डायमंड नाम की कंपनी का कारोबार 1991 में मात्र एक करोड़ का था तो मार्च 2014 तक 2100 करोड़ तक पहुंच गया है। उनके अनुसार इस वर्ष के अंत तक डायमंड एक्पोर्ट का लक्ष्य 2800 करोड़ का रखा गया है जो आसानी से पूरा हो जाएगा।
ढोलकिया के अनुसार उनकी कंपनी अभी 50 देशों के लिए ही हीरा सप्लाई करती है। दुनिया के 200 देश अभी बाकी हैं। हरे कृष्णा डायमंड के दुनिया के सात देशों में खुद के आउटलेट्स हैं। इसके अलावा दुनिया भर के 5000 हजार शोरूमों में इनका हीरा उपलब्ध है। हाल ही में ढोलकिया ने कर्मचारियों को मंहगे तोहफे दिए हैं लेकिन कर्मचारियों से काम कराने का उनका नजरिया भी अलग है।
कर्मचारियों से कैसे काम लेते हैं ढोलकिया?
कर्मचारियों से काम लेने के बारे में ढोलकिया बताते हैं कि उनकी कंपनी में कोई भी एमबीए, बीबीए या कोई डिप्लोमाधारी को उनके यहां जरूरी वेतन के साथ पांच साल तक ट्रेनिंग पर रखा जाता है। इस दौरान कर्मचारियों को इस स्तर का ज्ञान दिया जाता है कि वह कंपनी चला सके।
सावजी भाई ढोलकिया बताते हैं कि उनके पास 35 साल काम करने का अनुभव है और इसी के बराबर वह अपने हर कर्मचारी को पांच साल में सिखा देते हैं ताकि वह उनसे ज्यादा अच्छा काम कर सके। इतना ही नहीं वह कर्मचारियों को लेके उनका नजरिया भी अलग है।
उनका कहना है कि कर्मचारी से ऐसे काम लिया जाए, ऐसी सैलरी दी जाए जिससे की वह खुशी के साथ काम करे। उनका कहना है किसी कर्मचारी पर उनका ध्यान खुश रखने पर केंद्रित होता है और कर्मचारियों का ध्यान कंपनी को प्रॉफिट दिलाना।
ढोलकिया अपनी मां की इस बात को सबसे ज्यादा जोर देकर कहते हैं कि उनकी मां का कहना है अच्छा आदमी बनना है और अच्छा आदमी कैसा होता है? वह हमेशा अपने कर्मचारियों यही अनुभव कराने की कोशिश करते हैं।
इतना ही नहीं वह कहते हैं उनकी कोशिश होती है कि वह अपने कर्मचारी से ऐसा व्यवहार करें जैसे की अपने बेटे से करते हैं और इसकी जरा भी परवाह नहीं करते कि वह काम सीख जाएगा तो अपना बिजनेस शुरू कर देगा।
हरे कृष्णा एक्सपोर्ट का दुनिया के 71 देशों में हीरे का कारोबार फैला हुआ है। हरे कृष्णा एक्सपोर्ट ने अपने गोल्डन जुबली अवसर पर कर्मचारियों को बोनस देन के लिए 51 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। सावजी ढोलकिया 2011 से ही अपने कर्मचारियों को इसी तरह का खास दिवाली बोनस देते रहे हैं। पिछले वर्ष कर्मचारियों को दिवाली बोनस में उन्होंने 491 कारें और 200 फ्लैट दिए थे।
अपने चाचा से कर्ज लेकर हीरे का कारोबार शुरू करने वाले सावजी ढोलकिया गुजरात के अमरेली जिले के दुधाला गांव के रहने वाले हैं। जी-तोड़ मेहनत करने के बाद वह कंपनी को ऊंचाईयों तक ले गए हैं।
सावजी भाई ढोलकिया की हरे कृष्ण डायमंड एक्सपोर्ट कंपनी में करीबन 5500 कमर्चारी काम करते हैं। देश या दुनिया की किसी भी प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले कमर्चारियों को उनका मालिक या बॉस शायद ही कोई ऐसी गिफ्ट देता होगा जैसे महंगे गिफ्ट सूरत के हीरा कारोबारी सावजी भाई ढ़ोलकिया अपने कमर्चारियों को देते आये हैं।