जेट एयरवेज की उड़ानों को दोबारा पंख मिलने के लिए नई सरकार का इंतजार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव पूरा होने के बाद ही कंपनी के विमान उड़ने की उम्मीद है। तब तक नागर विमानन मंत्रालय, बैंक और मामले से जुड़े अन्य संस्थान अपना होमवर्क ही निबटाएंगे।
एसबीआई के अवकाश प्राप्त वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जेट एयरवेज को आपात फंड का फैसला एमडी एवं सीईओ या फिर बैंक का निदेशक मंडल करेगा। ऐसे में अगर कुछ वर्ष बाद यह कदम गलत साबित होता है तो उनकी गर्दन फंसना तय है। इतना नहीं उन्हें सीबीआई व अन्य एजेंसियों का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा अभी वेट एंड वॉच की रणनीति ही अपनाएंगे और नई सरकार बनने के बाद मिल-बैठकर फैसला करेंगे।
मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि कई बार अनौपचारिक या मौखिक रूप से सरकार ने बैंकों को जेट एयरवेज की मदद करने को कहा है, लेकिन लिखित तौर पर कुछ नहीं दिया। यही कारण है कि एसबीआई सहित अन्य बैंक अभी फंडिंग करने से परहेज कर रहे हैं। हालांकि, सरकार के संकेत पर नरेश गोयल ने चेयरमैन पद छोड़ दिया था। फिलहाल निवेश की तलाश जारी रखना ही बैंकों के पास एकमात्र विकल्प है।