कोरोना वायरस के कारण देशभर में गहराए संकट के बीच ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों को कोरोना का क्लेम नहीं दे रहीं। ऐसे में बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार एक्शन मोड में आ गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) के चेयरमैन एस सी खुंटिया से कहा कि वह सभी बीमा कंपनियों और नेटवर्क हॉस्पिटल को सख्त निर्देश दें कि वे कोरोना मरीजों के इलाज के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट उपलब्ध कराएं। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर के बीच ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई हैं, जहां अस्पतालों ने कोविड मरीजों को कैशलेस क्लेम देने से मना कर दिया।
वित्त मंत्री के निर्देश के बाद अब आईआरडीएआई ने इंश्योरेंस कंपनियों के नाम आदेश जारी कर साफ कहा है कि उन्हें अपने ग्राहकों को नेटवर्क अस्पतालों में अन्य बीमारियों की तरह ही कोरोना के लिए भी कैशलेस इलाज की सुविधा मुहैया करानी होगी। आईआरडीएआई के इस निर्देश का सीधा मतलब यही है कि अब इंश्योरेंस कंपनियों को कोरोना के इलाज को भी अन्य बीमारियों की तरह ही समझना होगा। आईआरडीएआई ने अपने निर्देश में यह भी साफ किया है कि अपने ग्राहकों को कैशलेस सुविधा का लाभ नहीं देने वाली इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोरोना काल में इंश्योरेंस इंडस्ट्री में क्लेम करीब 50 फीसद बढ़ा
उल्लेखनीय है कि महामारी के दौर में इंश्योरेंस इंडस्ट्री में क्लेम करीब 50 फीसद बढ़ा है। अब तक कोविड से जुड़े करीब 14 हजार 287 करोड़ रुपये के क्लेम हुए हैं, जिसमें से 7 हजार 561 करोड़ रुपये का सेटलमेंट हुई है। वित्त मंत्री ने गुरुवार को बताया था कि इंश्योरेंस कंपनियों ने 8 हजार 642 करोड़ रुपये के कोविड से जुड़े 9 लाख से ज्यादा क्लेम का निपटारा किया है।