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ईरान युद्ध भारतीय GDP के लिए चुनौती कैसे?: क्रूड-गैस के दाम बढ़ने से कंपनियों की कमाई पर असर; यहां जानिए सबकुछ

Fri, 06 Mar 2026 06:24 AM IST
Shubham Kumar अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी

सार

पश्चिम एशिया में युद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट अवधि में गंभीर चुनौती बन गया है। तेल की बढ़ती कीमतें, निर्यात में बाधा और धनप्रेषण पर असर जीडीपी के लिए दबाव डाल रहे हैं। एमपीसी सदस्य नागेश कुमार ने कहा कि राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों का समन्वित इस्तेमाल वृद्धि बनाए रखने के लिए जरूरी है।

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पश्चिम एशिया तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में युद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट अवधि में बड़ी चुनौती है, लेकिन इससे लंबे समय में वृद्धि प्रभावित नहीं होगी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य नागेश कुमार ने कहा, मौजूदा हालात में तेल की कीमतों में वृद्धि, निर्यात में बाधा और धनप्रेषण पर पड़ने वाला असर जीडीपी के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में वृद्धि दर को उच्च पथ पर ले जाने के लिए राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों को समन्वित तरीके से काम करने की जरूरत है।

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एमपीसी सदस्य ने कहा, ईरान हमलों के साथ निकट भविष्य में संघर्ष तेज होने और क्रूड में उछाल की आशंका है। हालांकि, इस क्षेत्र में दुनिया के उच्च दांव को देखते हुए संकट का जल्द ही समाधान हो जाएगा।
उधर, कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज ने कहा, अगर ईरान युद्ध कुछ सप्ताह से अधिक समय तक चलता रहा, तो भारत में कॉरपोरेट जगत की कमाई प्रभावित हो सकती है।

बाजार पर दबाव डाल सकती है तेल-गैस की कीमतें
युद्ध ने पहले से ही निवेशकों की धारणा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विदेशी निवेशक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को लेकर संवेदनशील बने हुए हैं। तेल-गैस की ऊंची कीमतें अर्थव्यवस्था एवं बाजार पर दबाव डाल सकती हैं। माल ढुलाई दरें 15-20 फीसदी बढ़ गई हैं। खाड़ी देशों को जाने वाली खेपों के लिए युद्ध-जोखिम अधिभार और बीमा प्रीमियम में काफी बढ़ोतरी हुई है। समुद्री ईंधन की कीमतें भी 520 डॉलर से बढ़कर 580 डॉलर प्रति टन पहुंच गई हैं।
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होर्मुज मार्ग में जोखिम के बावजूद 63 डॉलर से अधिक नहीं पहुंचेगी ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत
होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर जोखिम के बावजूद 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहने का अनुमान नहीं है। फिच रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को रिपोर्ट में कहा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतों में तेज बढ़ोतरी सीमित रह सकती है। इसके अलावा, होर्मुज में मौजूदा व्यवधान अस्थायी है। यह अभी औपचारिक रूप से बंद नहीं हुआ है, लेकिन ईरान या उससे जुड़े समूहों के संभावित हमलों के जोखिम को देखते हुए कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।

व्यापार-एलएनजी पर निर्भर क्षेत्र होंगे प्रभावित
क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा, ईरान युद्ध लंबे समय तक चलता रहा, तो यह बासमती चावल, उर्वरक, हीरा पॉलिश, एयरलाइंस और यात्रा परिचालकों सहित उन कई भारतीय क्षेत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है, जिनका पश्चिम एशिया के साथ सीधा व्यापारिक संबंध है। एजेंसी ने कहा, सिरेमिक और उर्वरक जैसे एलएनजी पर निर्भर क्षेत्र उत्पादन व्यवधान का सामना कर सकते हैं। वहीं, क्रूड से जुड़े उद्योग (रिफाइनी, टायर, पेंट, विशेष रसायन, पैकेजिंग, सिंथेटिक कपड़े) पर लागत का दबाव बढ़ेगा।
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सस्ती तेल आपूर्ति से होगा लाभ

पश्चिम एशिया संकट जल्द समाप्त हो जाता है और ईरान पर से प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं, तो भारत को सस्ती तेल आपूर्ति से लाभ हो सकता है। भारत के लिए वेनेजुएला से तेल आपूर्ति का खुलना भी मददगार हो सकता है, क्योंकि यह विकल्पों में विविधता लाता है। -नागेश कुमार, एमसीपी सदस्य, आरबीआई

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