केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी।
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ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 2024-25 में 1.77 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया। पिछले साल (1.57 लाख करोड़ रुपए) की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत वृद्धि हुई है। हालांकि, संशोधित अनुमान की तुलना में, मंत्रालय द्वारा की गई मध्य-वर्ष की समीक्षा में व्यय 1.71 लाख करोड़ रुपए था, वृद्धि तीन प्रतिशत है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश अंतरिम बजट में 2024-25 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के लिए 86,000 करोड़ रुपए आवंटित किया। पिछले बजट में 60,000 करोड़ रुपए से लगभग 43 प्रतिशत अधिक पैसे आवंटित किए गए हैं।
विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर (फाइल)
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वित्त वर्ष 2024-25 के लिए विदेश मंत्रालय को अंतरिम बजट में 22,154 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ है। वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि पिछले साल का परिव्यय 18,050 करोड़ रुपए था। उन्होंने कहा कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत 2,068 करोड़ रुपए का आवंटन किया जाएगा। सहायता पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा भूटान को दिया गया है। पिछले वित्त वर्ष यानी- 2023-24 में इस हिमालयी राष्ट्र के लिए विकास का खर्च 2,400 करोड़ रुपए था।
मालदीव के शेयर में कटौती
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा, ईरान के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भारत का फोकस बना हुआ है। चाबहार बंदरगाह के लिए आवंटन 100 करोड़ रुपए पर बनाए रखा गया है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, मालदीव को विकास सहायता पिछले साल के 770 करोड़ रुपए के मुकाबले 600 करोड़ रुपए रखी गई है। अफगानिस्तान के लिए 200 करोड़ रुपए की बजटीय सहायता निर्धारित की गई है।
अफ्रीकी देशों के लिए 200 करोड़ रुपये
बांग्लादेश को विकास सहायता के तहत 120 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की जाएगी। नेपाल को 700 करोड़ रुपए प्रदान किए जाएंगे। बजट दस्तावेजों के अनुसार, श्रीलंका को 75 करोड़ रुपए की विकास सहायता मिलेगी। मॉरीशस को 370 करोड़ रुपए मिलेंगे जबकि म्यांमार के लिए राशि 250 करोड़ रुपए आंकी गई है। अफ्रीकी देशों के लिए 200 करोड़ रुपए की अलग से राशि रखी गई है.
बजट: विदेश मंत्रालय को 2024-25 में 22,154 करोड़ रुपये का आवंटन
विदेश मंत्रालय (एमईए) को केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल 22,154 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। जबकि पिछले वर्ष का परिव्यय 18,050 करोड़ रुपये था। भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के अनुरूप, 2,068 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ सहायता पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा भूटान को दिया गया है।
2023-24 में हिमालयी राष्ट्र के लिए विकास परिव्यय 2,400 करोड़ रुपये था। ईरान के साथ संपर्क परियोजनाओं पर भारत के फोकस को रेखांकित करते हुए, चाबहार बंदरगाह के लिए आवंटन भी 100 करोड़ रुपये पर बनाए रखा गया है। बजट दस्तावेज के अनुसार, मालदीव को विकास सहायता पिछले साल के 770 करोड़ रुपये के मुकाबले 600 करोड़ रुपये रखी गई है। अफगानिस्तान के लोगों के साथ भारत के विशेष संबंधों को जारी रखते हुए, उस देश के लिए 200 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता निर्धारित की गई है।
बांग्लादेश को विकास सहायता के तहत 120 करोड़ और नेपाल को 700 करोड़ दिया जाएगा। श्रीलंका को 75 करोड़ की विकास सहायता राशि दी जाएगी, वहीं मॉरीशस को 370 करोड़ और म्यांमा को 250 करोड़ की राशि दी जाएगी। अफ्रीकी देशों के लिए 200 करोड़ राशि अलग रखी गई है।