सार
दिसंबर 2025 तक ग्रामीण इलाकों के लिए ‘बीमा विस्तार’ योजना शुरू हो सकती है, जो जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति का एक समग्र बीमा कवरेज प्रदान करेगी। कमलेश राव के अनुसार, सभी बीमा कंपनियां इसे समान प्रीमियम पर बेचेंगी। योजना से हर व्यक्ति को 5 लाख रुपये का बीमा मिलेगा, जिससे ग्रामीण भारत में बीमा की पहुंच बढ़ेगी।
स्वास्थ्य बीमा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई
देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति का एक समग्र बीमा उत्पाद ‘बीमा विस्तार’ दिसंबर, 2025 तक पेश किया जा सकता है। इसका मतलब है कि ग्रामीणों को अब अलग-अलग जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति बीमा नहीं खरीदना पड़ेगा। उन्हें बीमा विस्तार के जरिये एक ही उत्पाद में जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति तीनों कवर मिल जाएगा।
लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल की बीमा जागरूकता समिति (आईएसी-लाइव) के चेयरमैन कमलेश राव ने बुधवार को बताया, बीमा विस्तार खासतौर पर ग्रामीण भारत के लिए तैयार किया गया है। इसे सभी बीमा कंपनियां एक समान प्रीमियम दर पर बेचेंगी। इस योजना के तहत हर व्यक्ति को पांच लाख रुपये का बीमा कवर मिलेगा। परिषद में जीवन बीमा निगम (एलआईसी) सहित सभी 26 जीवन बीमा कंपनियां सदस्य हैं। राव ने कहा, ग्रामीण भारत में बीमा की पहुंच कम है। बीमा विस्तार योजना शुरू करने का मकसद देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बढ़ाना है।
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जीवन बीमा : जागरूकता बढ़ाने को चलेगा अभियान
चेयरमैन ने कहा, जीवन बीमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘सबसे पहले जीवन बीमा’ टैगलाइन के साथ व्यापक अभियान शुरू किया है। तीन वर्षों तक चलने वाले इस अभियान के लिए 150 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। सभी बीमा कंपनियों की प्रबंधन के तहत अधीन संपत्तियां (एयूएम) वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 67 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई हैं। कुल प्रीमियम संग्रह पिछले पांच वर्षों में 10 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है।
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प. बंगाल में बीमा पहुंच बढ़ाने की उच्च संभावना
चेयरमैन ने कहा, आईएसी-लाइफ ने एक शोध कराया था, जिसमें पता चला कि पश्चिम बंगाल उन राज्यों में से एक है, जहां जीवन बीमा की पहुंच बढ़ाने की उच्च संभावना है। यह पूछने पर कि क्या जीवन बीमा उद्योग को म्यूचुअल फंडों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, राव ने कहा कि पांच साल में जीवन बीमा कंपनियों का एयूएम सालाना 13 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। वहीं, म्यूचुअल फंडों के लिए यह दर 17 फीसदी है।