नई सरकार का गठन पूरा हो चुका है और अब आम बजट पेश होने की तैयारी है। जानकारों को उम्मीद है कि जुलाई के तीसरे सप्ताह में बजट पेश किया जा सकता है। इससे पहले सरकार ने इस साल चुनाव से पहले फरवरी में अतरिम बजट पेश किया था। आने वाले बजट को देखते हुए देश के उद्योग जगत ने सरकार के सामने अपनी मांगों को रखना शुरू कर दिया है। लगातार सातवीं बार बजट पेश करने जा रही वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक आगामी 22 जून 2024 को राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली है। जिसमें जीएसटी को सरल करने और कई सेक्टर में दरों को कम करने पर चर्चा संभव है। अक्टूबर 2023 में हुई बैठक के बाद यह जीएसटी परिषद की पहली बैठक होगी।
उद्योगों को आयकर में राहत की उम्मीद
भारतीय उद्योग परिसंघ के नए अध्यक्ष संजीव पुरी का मानना है कि आगामी पूर्ण बजट 2024-25 में मुद्रास्फीति की उच्चदर को देखते हुए सरकार को आयकर के सबसे निचले स्लैब के लोगों के लिए राहत पर विचार करने की आवश्यकता है। वहीं टैक्स में सरलीकरण की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सरकार की ओर से कुछ सामने नहीं आया है लेकिन टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है या फिर टैक्स की दरों को कम किया जा सकता है।
एमएसएमई पर लागू 43 बी(एच) कानून में संशोधन की मांग
इस साल से सूक्ष्म, मध्य एंव लघु इकाइयां (एमएसएमई) पंजीकृत व्यापारियों पर लागू की गई 43 बी(एच) कानून में संशोधन की मांग कर रहा है। इसके तहत व्यापारियों को खरीदे गए माल के पैसों का भुगतान 45 दिनों के अंदर ही करना होता है, लेकिन व्यापारी भुगतान के लिए 90 दिन का समय देने की मांग रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इससे कामकाज पर असर पड़ता है। अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है कि जीएसटी की दरों में कटौती के साथ इसको सरल करने की जरूरत है। खुदरा व्यापारियों के लिए बिना गारंटी लोन किफायती ब्याज दर उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे मल्टीनेशनल कंपनियों से घरेलू कंपनियां मुकाबला कर सकें। ऑपर्च्यूनएचआर कंपनी के संस्थापक और निदेशक ध्वनि मेहता कहते हैं कि हम उम्मीद करते हैं कि इस बजट में वित्तमंत्री एमएसएमई को साइबर सुरक्षा के खतरों, आर्थिक झटकों और सप्लाई चेन में हो रही परेशानियों पर ध्यान देगी।
ज्वेलरी इंडस्ट्री में ईजीआर कारोबार को कर मुक्त करने पर जोर
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सोने पर आयात शुल्क घटेगा। साथ ही एक्सचेंजों पर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) कारोबार कर मुक्त किया जाना चाहिए। इंडस्ट्री की मांग है कि यूएई-भारत समझौते के तहत दुबई से आयातित चांदी पर शुल्क सोने के शुल्क के अनुरूप ही होना चाहिए। इससे कारोबार में आसानी होगी। वर्तमान में सोने, चांदी, कीमती धातुओं और सिक्कों पर आयात शुल्क 15 प्रतिशत है। जिसमें 10 प्रतिशत बेसिक ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इन्फ्रास्टेक्चर डेवलपमेंट सेस शामिल है।
ऑटो इंडस्ट्री में एंट्री लेवल पैसेंजर वीकल पर जीएसटी दरें हो कम
टोयोटा किर्लोस्टकर के ऑटो के उप प्रबंध निदेशक (कॉर्पोरेट योजना, वित्त एवं प्रशासन और विनिर्माण) स्वप्नेश मारू कहते हैं कि, हमें उम्मीद है कि सरकार लगातार ऑटो सेक्टर को आगे बढ़ाएगी और ग्रीन फ्यूचर पर ध्यान देते हुए पेट्रोल डीजल पर निर्भरता कम करेगी। फाडा के महाराष्ट्र क्षेत्र के अध्यक्ष सचिन वसंतराव महाजन का कहना है कि बजट में एन्ट्री लेवल के पैसेंजर वाहनों में जीसएटी दरों को कम करने का करने की आवश्यकता है। वर्तमान में एंट्री लेवल पैसेंजर कार और दोपहिया वाहनों पर 28 प्रतिशत जीएसटी है, जिसे घटाकर सरकार को 18 प्रतिशत तक लाने का आग्राह हम सरकार से कर रहे हैं। क्योंकि दोपहिया वाहन गांवों और छोटे शहरों में ट्रांस्पोर्ट के बेहतर विकल्प हैं, इसलिए इससे ग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा।
हेल्थ सेक्टर में बुनियादी ढांचागत सुधार आवश्यक
स्टार्टअप कंपनी मेडटेक का कहना है कि हम सरकार से समर्थन की आशा करते हैं। हेल्थ सेक्टर में निवेश के जरिए भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। नागरिकों के लिए सस्ती दवाईयां और देखभाल की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का लगतार सरकार का फोकस रहेगा।