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मध्य प्रदेश की पहचान बनेगा इंदौरी पोहा और मावा जलेबी

Mon, 30 Jul 2018 12:23 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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poha
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जल्द ही पोहा और मावा जलेबी जैसे नाश्ते पर मध्य प्रदेश सरकार अपना हक जताने जा रही है। इसके साथ ही चंदेरी साड़ियों और जाली बनाने के उद्योग पर भी इनको जीआई टैग देने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं। 
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एक्जिम बैंक ने की सिफारिश

एक्सपोर्ट एंड इंपोर्ट बैंक (एक्जिम) ने प्रदेश सरकार से सिफारिश की है कि वो जल्द ही अपने इन उत्पादों के लिए जीआई टैग हासिल करे। इससे दुनिया भर में इन उत्पादों को निर्यात करने में आसानी होगी और सरकार की कमाई के रास्ते खुलेंगे। 

यह होता है जीआई टैग

जीआई टैग के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह ऐसे उत्पादों को दिया जाता है, जिससे एक खास जगह की पहचान होती है। इस टैग के मिलने के बाद कोई भी अन्य व्यक्ति या फिर संस्था उसे अपना नहीं बता सकती हैं। यह एक तरह से बौद्धिक संपदा भी होती है। 
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इंदौर के पोहे का नहीं है कोई सानी

अगर आप नाश्ते की बात करें तो फिर इंदौर के पोहा के आगे सभी फेल हैं। वैसे तो पोहा देश भर के कई राज्यों खासकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, यूपी के कुछ हिस्सों और दिल्ली-एनसीआर में मिलता है, लेकिन स्वाद के मामले में इनमें वो बात नहीं है जो कि इंदौर के पोहे में है।

मध्य प्रदेश के ज्यादातर लोगों के दिन की शुरुआत इसी डिश से होती है। ये डिश ना सिर्फ एमपी के लोगों का दिल जीत चुकी है बल्कि कई उत्तर भारतीय राज्यों में भी इसका स्वाद लोगों की जुबांन पर रहता है। पोहे के ऊपर डली सेंव, मीठा नीम  (कड़ी पत्ता), कच्चे प्याज व तली मूंगफली के दानों से इसको दिन की शुरुआत के लिए सबसे बढ़िया माना जाता है। 

मावा जलेबी का भी गजब का स्वाद

मुगल काल में "दक्षिण के प्रवेश द्वार" के रूप में मशहूर ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर की जलेबी मावे (खोवा) से बनती है। मुंह में पानी ला देने वाली अनोखी मिठास के लिए यह व्यंजन दूर-दूर तक मशहूर है। मावे की जलेबी बुरहानपुर की मीठी विरासत है और इस पारम्परिक व्यंजन पर उनके गृह क्षेत्र का दावा बेहद मजबूत है।
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