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Manufacturing PMI: देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच विर्निमाण क्षेत्र की वृद्धि स्थिर, पीएमआई 54.6 रहा

Wed, 01 Jun 2022 03:22 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नए ऑर्डर और उत्पादन में वृद्धि की दर पिछले महीने जैसी बनी रही, जबकि बिक्री कीमतों में उछाल के बावजूद मांग में लचीलेपन के संकेत देखने को मिले। पीएमआई 50 से ऊपर होने का मतलब विस्तार होता है, जबकि 50 से नीचे होना संकुचन को प्रदर्शित करता है। 
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विनिर्माण क्षेत्र - फोटो : pixabay
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विस्तार
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भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि मई महीने में स्थिर रही। एसएंडपी की भारतीय विनिर्माण परिदृश्य के बारे में बुधवार को जारी मासिक रिपोर्ट में बताया गया कि मई में विनिर्माण क्षेत्र का खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) 54.6 रहा, जो कि अप्रैल में 54.7 पर था। यह विनिर्माण क्षेत्र में पुनरुद्धार गतिविधियों के काफी हद तक स्थिर रहने का संकेत है।

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रिपोर्ट में कहा गया कि नए ऑर्डर और उत्पादन में वृद्धि की दर पिछले महीने जैसी बनी रही, जबकि बिक्री कीमतों में उछाल के बावजूद मांग में लचीलेपन के संकेत देखने को मिले। गौरतलब है कि पीएमआई 50 से ऊपर होने का मतलब विस्तार होता है, जबकि 50 से नीचे का स्कोर का होना संकुचन को प्रदर्शित करता है। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में एसोसिएट डाइरेक्टर (अर्थशास्त्र) पोलियाना डी लीमा का कहना है कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने मई में मजबूत विकास गति को बनाए रखा। अंतरराष्ट्रीय बिक्री में सबसे तेज वृद्धि के लिए धन्यवाद, कुल नए ऑर्डर में भी बढ़ोतरी हुई। मांग में लचीलापन को देखते हुए अपने स्टॉक को नए सिरे से तैयार करने की कोशिशें जारी रखीं और अतिरिक्त लोगों को काम पर भी रखा।

रिपोर्ट में कहा गया कि नए निर्यात ऑर्डर मिलने की दर भी मई में बढ़ी है। यह अप्रैल 2011 के बाद का सबसे तीव्र और सबसे तेज विस्तार है। बिक्री में जारी सुधार के कारण मई में विनिर्माण क्षेत्र की नौकरियां भी बढ़ीं। मामूली वृद्धि होने के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र की रोजगार वृद्धि दर जनवरी 2020 के बाद सबसे मजबूत हो गई है। कीमतों के मोर्चे पर मई लगातार 22वां महीना रहा जब उत्पादन की लागत बढ़ी है। कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बिजली, खाद्य पदार्थों, धातुओं और वस्त्रों के लिए उच्च कीमतें दर्ज की। सर्वेक्षण के मुताबिक, मई में मुद्रास्फीति की चिंताओं से कारोबारी धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ा और कारोबारी विश्वास का समग्र स्तर दो साल में नीचे से दूसरे स्थान पर रहा।

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