भारत और पड़ोसी मालदीव के बीच हाल के दिनों में जारी खटास के बीच द्वीपीय राष्ट्र में पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों बहुत हद तक गिर गई है। इसका असर मालदीव के पर्यटन उद्योग पर पड़ना शुरू हो गया है और मांग उठने लगी है कि भारत के साथ संबंधों को जल्द से जल्द सुधारा जाए। 2023 में मालदीव पहुचंने वाले पर्यटकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक थी, पर 2024 भारतीय पर्यटकों की संख्या छठे नंबर पर पहुंच गई है। इससे पर्यटन पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि 2024 में पर्यटकों के आगमन के मामले में भारत छठे स्थान पर है। 2020 से मालदीव पहुंचने वाले पर्यटकों में भारतीय पर्यटकों की संख्या लगातार पहले स्थान पर रही है। भारतीय पर्यटक महामारी के समय में भी द्वीपीय राष्ट्र का दौरा कर रहे थे। मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है 2 मार्च 2024 तक 27,224 भारतीय पर्यटक मालदीव पहुंचे, जो पिछले साल की तुलना में 33 प्रतिशत कम है, जब इस अवधि में 41,224 लोग मालदीव पहुंचे थे।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसी ट्रैवल एजेंसियां और ऑपरेटर जो भारतीय पर्यटकों पर निर्भर करते हैं, अपने राजस्व में 80 प्रतिशत तक की गिरावट की बात कह रहे हैं, जो कि एक खतरनाक स्थिति है। ट्रैवल एजेंसी 'लेट्स गो मालदीव' के एक अधिकारी के हवाले से पोर्टल ने कहा कि मालदीव पहुंचने वाले भारतीय पर्यटक अलग-अलग वर्गों से आते हैं और ये गर्मियों के लिए एक बड़ा बाजार हैं। मालदीव के एक अधिकारी ने कहा है कि भारतीय पर्यटकों के नहीं आने से पर्यटन उद्योग के ऑक्यूपेंसी रेट में गिरावट आई है। भारत पर्यटक हमारे लिए महत्वपूर्ण बाजार हैं।
रिपोर्ट में एक प्रमुख ट्रैवल एजेंसी ट्रैवल कनेक्शन मालदीव के हवाले से कहा गया है कि सिर्फ भारतीय पासपोर्टधारकों ने ही मालदीव का बहिष्कार नहीं किया है, बल्कि समृद्ध और धनी भारतीय मूल के यात्रियों के अन्य देशों से मालदीव आने में भी गिरावट आई है। ट्रैवल कनेक्शन के सीईओ मोहम्मद मिरशाद के अनुसार यह मालदीव पर्यटन में भारतीय बाजार की महत्ता को दर्शाती है। अधिकारियों को उम्मीद है कि मालदीव में हनीमाधू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और भारत के केरल राज्य में तिरुवनंतपुरम के बीच सीधी उड़ानों के फिर से शुरू होने से भारत से कुछ और पर्यटक वापस आएंगे।
न्यूज पोर्ट्ल Sun.mv ने कहा है कि अहंकार से हमें फायदा नहीं होगा, यह देश की संवेदनशील अर्थव्यवस्था को और भी नुकसान पहुंचाएगा। सच्चा ज्ञान अपनी कमजोरियों और शक्तियों को स्वीकार करने में निहित है, और वास्तविकता यह है कि हमें भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान से बचना चाहिए।