ब्रिटेन की प्रमुख शिक्षाविद भारतीय मूल की डॉ. स्वाति ढींगरा को बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर निर्धारण समिति के स्वतंत्र सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। इस पद पर नामित होने वाली वह पहली भारतीय मूल की महिला हैं।
तीन साल का होगा कार्यकाल
ढींगरा लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) में अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्हें इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स और अप्लाइड माइक्रोमकोनॉमिक्स में विशेषज्ञता प्राप्त है। यहां बता दें कि ढींगरा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। उन्होंने विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय से एमएस और पीएचडी पूरी की है और यूके के ट्रेड मॉडलिंग रिव्यू एक्सपर्ट पैनल और एलएसई के आर्थिक कूटनीति आयोग की सदस्य रह चुकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वह नौ अगस्त को तीन साल के कार्यकाल के लिए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) में शामिल होंगी। ढींगरा वर्तमान स्वतंत्र सदस्य माइकल सॉन्डर्स की जगह लेंगे, जो अगस्त 2016 से एमपीसी में हैं।
अहम जिम्मेदारी वाला है यह पद
गौरतलब है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड का स्वतंत्र सदस्य एमपीसी ब्रिटेन की मौद्रिक नीति के संचालन के बारे में निर्णय लेता है। इसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर, इसके तीन डिप्टी गवर्नर, बैंक के एक सदस्य के साथ मौद्रिक नीति की जिम्मेदारी और चार बाहरी सदस्य शामिल हैं जिन्हें चांसलर द्वारा नियुक्त किया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि ब्रिटिश चांसलर ऋषि सनक ने पिछले हफ्ते ढींगरा की नियुक्ति की घोषणा की, जिसमें उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया गया जो समिति के लिए मूल्यवान साबित होगा। एमपीसी के प्रत्येक सदस्य के पास अर्थशास्त्र और मौद्रिक नीति के क्षेत्र में विशेषज्ञता है।