भारत में सोना सिर्फ धन नहीं, यह हमारी पहचान का हिस्सा है। यह वह बेशकीमती उपहार है, जो दादी-नानी शादी में आशीर्वाद के रूप में देती हैं। माता-पिता इसे गुपचुप तरीके से तिजोरी में सहेज कर रखते हैं और जरूरत के समय यही सोना हर परिवार का सहारा बनता है। इस प्रकार, सोना सिर्फ धातु नहीं, बल्कि यादों, परंपरा और भावनाओं का प्रतीक है। लेकिन, यह बात भी नहीं भूलनी चाहिए कि सोना दुनियाभर में सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प भी है। बात जब निवेश की आती है, तो आपको अपने पोर्टफोलियो को संतुलित बनाना भी जरूरी होता है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि सोने को सिर्फ घर में रखकर छोड़ देना कितना सही फैसला है।
दाम बढ़ रहा हो, तो बेचना कितना सही
2015 में सोने की कीमत लगभग 26,343 रुपये प्रति 10 ग्राम थी और अप्रैल, 2025 तक यह करीब 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं। इस प्रकार, सोने ने 10 वर्षों में लगभग 280 फीसदी रिटर्न दिया है। यह बाजार के अन्य निवेश विकल्पों से कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन है। दुनियाभर में चल रहे उथल-पुथल के चलते आने वाले साल में सोने में 20-30 फीसदी और तेजी का अनुमान है। इस ताबड़तोड़ तेजी के बीच लोगों के मन में सोना बेचने का विचार आता है। हालांकि, सोने को बेचना आपकी वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करता है। लेकिन, सही कीमत पाने के लिए आपको जेवर को हॉलमार्क कराना होगा।
शेयर बढ़ने पर बेच देते हैं, तो सोना क्यों नहीं?
सोना सिर्फ धातु नहीं, भावनाओं का खजाना है। सोने की चेन आपको मां की याद दिला सकती है। आपकी तिजोरी में जो सोने का सिक्का रखा है, अब आपको अपने बच्चे की पैदाइश याद दिला सकता है। यही कारण है कि सोने को बेचना हमें अपनी विरासत से बिछड़ने जैसा लग सकता है। लेकिन, ध्यान रखें कि सोना एक संपत्ति भी है और शेयरों की तरह इसका मूल्यांकन करना जरूरी है। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो भाव बढ़ने पर शेयर बेच देते हैं। लेकिन, सोना बेचना नहीं चाहते। ऐसे में आप गोल्ड लोन ले सकते हैं। वहीं, अगर आपके पास डिजिटल सोना है, तो आप इसे गोल्ड एफडी स्कीम में डालकर सालाना 2.5 फीसदी ब्याज कमा सकते हैं।
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