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RBI Report: चालू वित्त वर्ष में 6.6% वृद्धि दर का अनुमान; रिपोर्ट- बैंकों का एनपीए 12 साल के निचले स्तर पर

Mon, 30 Dec 2024 03:49 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

RBI Report: भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित कर रही है। 2024-25 में जीडीपी 6.6 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में यह बात कही है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंकों का एनपीए भी घटकर 12 वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। आइए इस बारे में और विस्तार से जानें।
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आरबीआई - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित कर रही है। 2024-25 में जीडीपी 6.6 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। आरबीआई की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात कई वर्षों के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है।

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आरबीआई रिपोर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एनबीएफसी पर्याप्त पूंजी बफर, मजबूत ब्याज मार्जिन और आय तथा बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के साथ स्वस्थ बनी हुई हैं। आरबीआई रिपोर्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीफ की बम्पर फसल और रबी फसल की संभावनाओं के अवस्फीतिकारी प्रभाव से खाद्यान्न की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है।

भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित कर रही है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2024-25 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। इसे ग्रामीण उपभोग में सुधार, सरकारी उपभोग और निवेश में तेजी सेवा क्षेत्र के मजबूत निर्यात से मदद मिलेगी। यह बात सोमवार को आरबीआई की एक रिपोर्ट में कही गई।

बैंकों का सकल एनपीए घटकर 12 साल के निचले स्तर 2.6 प्रतिशत पर आया

भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को कहा कि बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में और सुधार हुआ है तथा उनकी सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (जीएनपीए) या खराब ऋण अनुपात सितंबर 2024 में घटकर 12 साल के निचले स्तर 2.6 प्रतिशत पर आ गया।

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आरबीआई ने विशेष रूप से निजी क्षेत्र के बैंकों (पीवीबी) के बीच राइट-ऑफ में तेज वृद्धि पर भी चिंता जताई, जो असुरक्षित ऋण क्षेत्र में बिगड़ती परिसंपत्ति गुणवत्ता और अंडरराइटिंग मानकों में कमजोरी को आंशिक रूप से छुपा सकता है।

आरबीआई की दिसंबर 2024 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) के अनुसार, शुद्ध एनपीए अनुपात या शुद्ध ऋण और अग्रिम में शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का अनुपात लगभग 0.6 प्रतिशत था।

अधिकांश अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी बफर

आरबीआई के अनुसार मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि अधिकांश एससीबी के पास पर्याप्त पूंजी बफर है। स्ट्रेस टेस्ट म्यूचुअल फंड और क्लियरिंग कॉरपोरेशन के लचीलेपन के भी संकेत देते हैं। अर्थव्यवस्था के बारे में एफएसआर ने कहा कि 2024-25 की पहली छमाही के दौरान वास्तविक जीडीपी वृद्धि (वर्ष दर वर्ष) घटकर 6 प्रतिशत रह जाएगी, जो 2023-24 की पहली छमाही और दूसरी छमाही में क्रमशः 8.2 प्रतिशत और 8.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

आरबीआई ने कहा, "घरेलू कारकों, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश, मजबूत सेवा निर्यात और आसान वित्तीय स्थितियों में तेजी से समर्थन मिलने से 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में विकास दर में सुधार होने की उम्मीद है।"

महंगाई पर रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे चलकर, खरीफ की बंपर फसल के अवस्फीतिकारी प्रभाव तथा रबी फसल की संभावनाओं के कारण खाद्यान्नों की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। दूसरी ओर, चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति खाद्य मुद्रास्फीति की गतिशीलता के लिए जोखिम पैदा करती रहती है। लगातार जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और भू-आर्थिक विखंडन भी वैश्विक आपूर्ति शृंखला और वस्तुओं की कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।

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