भारत और अमेरिका के अधिकारी प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए 23 अप्रैल से वाशिंगटन में तीन दिवसीय वार्ता करेंगे। इस बातचीत में टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं और सीमा शुल्क सुविधा से जुड़े 19 अध्यायों पर चर्चा होगी। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
भारतीय अधिकारियों का दल अमेरिका में आधिकारिक दल 90-दिवसीय टैरिफ विराम अवधि में वार्ता को और गति देने और द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए औपचारिक रूप से वार्ता शुरू करेगी। इससे पहले कुछ मुद्दों पर मतभेदों को दूर करने के लिए इन ToRs ( trade pact with terms of references) पर मंथन होगा।
भारत के मुख्य वार्ताकार, वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल, दोनों देशों के बीच पहली आमने-सामने की वार्ता के लिए टीम का नेतृत्व करेंगे। अग्रवाल को 18 अप्रैल को अगला वाणिज्य सचिव नियुक्त किया गया था। वे 1 अक्तूबर से पदभार ग्रहण करेंगे।
अधिकारी ने कहा, "दोनों पक्ष महत्वाकांक्षा के स्तर पर चर्चा करेंगे। कार्य-दर-नियमों को आगे विकसित किया जाएगा और उन पर चर्चा की जाएगी। वार्ता का मार्ग क्या होगा? कार्य-दर-नियमों में टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाएं, उत्पत्ति के नियम, माल, सेवाएं, सीमा शुल्क सुविधा तथा विनियामक मुद्दे जैसे मुद्दे शामिल होंगे।" उन्होंने कहा कि समझौते की सामान्य रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी, साथ ही समय-सारिणी पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि 90 दिनों में चीजों को अंतिम रूप दिया जा सके।
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इससे पहले, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच भारतीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण व्यापार चर्चा के लिए 25 से 29 मार्च तक भारत में थे। दोनों पक्ष वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से 9 अप्रैल को घोषित 90-दिवसीय टैरिफ विराम का फायदा उठाने इच्छुक हैं। 15 अप्रैल को वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा था कि भारत अमेरिका के साथ यथाशीघ्र वार्ता समाप्त करने की कोशिश करेगा।
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भारत और अमेरिका मार्च से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने इस साल की सितंबर-अक्तूबर तक समझौते के पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से भी अधिक बढ़ाकर 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर करना है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 191 अरब डॉलर है।
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