उत्पादन में बड़ी गिरावट के बावजूद चीनी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है। साथ ही राज्य सरकारों ने भरोसा दिलाया है कि जब तक केंद्र की ओर से दाम बढ़ाने के संकेत नहीं मिलते हैं, कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। चीनी मिल संगठन (एस्मा) ने बृहस्पतिवार को बताया कि एक्स मिल कीमतें स्थिर रहने से मिलों को भी गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने में सहूलियत हो रही है।
चीनी मिल संगठन के अनुसार, उत्तर भारत में चीनी की एक्स-मिल कीमत 3,250-3,350 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं, दक्षिण भारत में यह 3,100-3,250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। केंद्र सरकार जब तक 2019-20 के लिए उचित पारिश्रमिक मूल्य में इजाफा नहीं करती है, तब तक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्य स्टेट एडवाइस्ड प्राइस में बढ़ोतरी नहीं करेंगे। अभी चीनी मिलें किसानों का बकाया समय पर भुगतान करने की बेहतर स्थिति में हैं।
अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में देश का चीनी उत्पादन 2018-19 के 1.17 करोड़ टन से घटकर 77.9 लाख टन पर आ गया है। एस्मा ने अनुमान जताया है कि इस साल चीनी का कुल उत्पादन 2.6 करोड़ टन रह सकता है, जबकि एक साल पहले 3.31 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था। हालांकि, मौजूदा गिरावट के बाद एस्मा उत्पादन के आंकड़ों को संशोधित करने की तैयारी में है। उसका अंदाजा है कि जिस तरह पहली तिमाही में उत्पादन कम रहा, उससे पूरे साल में पूर्व के अनुमान से ज्यादा कमी आ सकती है।
सबसे ज्यादा चीनी उत्पादन करने वाले राज्य महाराष्ट्र में दिसंबर तक 16.5 लाख टन का ही उत्पादन हुआ जो पिछले साल इसी अवधि में 44.5 लाख टन रहा था। बाढ़ प्रभावित गन्ने में शुक्रोज की मात्रा भी पिछले साल के 10.5 फीसदी से घटकर 10 फीसदी पर आ गई है। राज्य सरकार ने कहा है कि श्रमिकों और गन्ने की कमी के कारण अहमदाबाद और औरंगाबाद में एक-एक मिल बंद पड़ी है। दूसरे पायदान पर काबिज यूपी में पिछले साल की पहली तिमाही की तुलना में चीनी का उत्पादन बढ़ा है। पिछले साल यहां 31 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल 33.10 लाख टन चीनी बनी है। तीसरे बड़े उत्पादक राज्य कर्नाटक में पिछले साल के 21 लाख टन के मुकाबले इस साल 16.3 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है।