अमेरिका की तरफ से भारतीय ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ लगाने के खिलाफ भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में जवाबी शुल्क लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। लेकिन एक सरकारी अधिकारी ने साफ किया है कि यह एक प्रक्रिया से जुड़ा कदम है और इसका भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (बीटीए) पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या है मामला?
भारत ने विश्व व्यापार संगठन के तहत अमेरिका पर जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका ने 26 मार्च 2025 को 'सेफगार्ड उपायों' के तहत भारत सहित कई देशों से आने वाले ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ लगा दिया था। इसे भारत ने डब्ल्यूटीओ के सेफगार्ड समझौते के तहत चुनौती दी थी। भारत ने पहले अमेरिका से इस मुद्दे पर बातचीत की थी, और अब 30 दिन की बातचीत की समयसीमा पूरी होने के बाद, भारत ने विश्व व्यापार संगठन को सूचित किया है कि वह अमेरिका के कुछ उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
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क्या होगा असर?
इस नोटिफिकेशन का मतलब यह नहीं है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार समझौता वार्ताएं रुक जाएंगी। अधिकारी ने कहा कि यह डब्ल्यूटीओ प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत और अमेरिका सितंबर-अक्तूबर 2025 तक इस समझौते के पहले चरण को पूरा करने की कोशिश में लगे हैं। इस समझौते का लक्ष्य वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को वर्तमान 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है।
ट्रंप की नई टैरिफ चेतावनी
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने 10-12 देशों को नए टैरिफ लगाने की सूचना देने के लिए पत्र साइन कर दिए हैं, जिन्हें सोमवार को भेजा जाएगा। यह भारत-अमेरिका वार्ता के बीच नई चुनौती बन सकती है।
9 जुलाई की डेडलाइन के पहले अनिश्चितता
भारत और अमेरिका 9 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि यह ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ पर 90 दिनों की अस्थायी छूट की अंतिम तारीख है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक यह समझौता तय समय से पहले हो पाएगा या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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भारत का रुख साफ- दबाव में नहीं आएंगे
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत कोई भी व्यापार समझौता किसी समयसीमा के दबाव में नहीं करता। भारत केवल तभी समझौता करेगा जब वह पूरी तरह तैयार, निष्पक्ष और राष्ट्रीय हित में होगा। उन्होंने दोहराया कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) तभी संभव है जब दोनों देशों को बराबरी से लाभ हो — यानी यह एक विन-विन डील होनी चाहिए।