मांग में आई तेजी और उत्पादन व नए ऑर्डरों में अक्टूबर 2020 के बाद सबसे मजबूत वृद्धि के बाद मार्च में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 16 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मार्च में 16 साल के उच्च स्तर 59.1 पर पहुंच गया, जो फरवरी में 56.9 पर था।
परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) की भाषा में सूचकांक का 50 से ऊपर रहना विस्तार को दर्शाता है जबकि 50 से नीचे रहना संकुचन को दर्शाता है। एचएसबीसी के अर्थशास्त्री इनेस लैम ने कहा, "भारत में मार्च का विनिर्माण पीएमआई 2008 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। विनिर्माण कंपनियों ने मजबूत उत्पादन और नए आर्डर के बाद भर्ती का विस्तार किया। मजबूत मांग और क्षमता में मामूली सख्ती के कारण मार्च में इनपुट लागत मुद्रास्फीति में तेजी आई।"
मार्च में विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में 33वें महीने और अक्टूबर 2020 के बाद से सबसे बड़ी वृद्धि दिखी। इस दोरान उपभोक्ता, मध्यवर्ती और निवेश वस्तुओं के क्षेत्रों में तेजी दिखी। घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों से नए काम की आमद मजबूत हुई। सर्वेक्षण में कहा गया है कि मई 2022 के बाद से नए निर्यात ऑर्डर सबसे तेज गति से बढ़े। 2023 के मध्य से खरीद की मात्रा में सबसे तेज दर से वृद्धि हुई, और यह लगभग 13 वर्षों में सबसे मजबूत रही।
नौकरियों की बात करें तो दो महीने पेरोल के मोटे तौर पर अपरिवर्तित रहने के बाद, मार्च में भारत के विनिर्माण क्षेत्र में श्रमिकों का इजाफा हुआ। सर्वेक्षण में कहा गया है कि रोजगार सृजन की गति हल्की रही, लेकिन यह सितंबर 2023 के बाद से सबसे अच्छी है।
मार्च महीने में कंपनियों पर लागत का दबाव पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर रहा। कंपनियों ने कपास, लोहा, मशीनरी उपकरण, प्लास्टिक और स्टील के लिए अधिक भुगतान करने की सूचना दी।