फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Trade: 'द्विपक्षीय व्यापार शर्तों को अपने लाभ के लिए नहीं चुन सकता बांग्लादेश',सरकार ने कहा- उसे यह समझना होगा

Sun, 18 May 2025 07:14 PM IST
शिव शुक्ला बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत ने कल बांग्लादेश से तैयार कपड़ों को केवल कोलकाता और न्हावा शेवा समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से प्रवेश की अनुमति देने का फैसला किया। साथ ही पूर्वोत्तर में भूमि पारगमन चौकियों के जरिये कई उपभोक्ता वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी। इस प्रकार के बंदरगाह प्रतिबंध भारत से होकर गुजरने वाले और नेपाल-भूटान जाने वाले बांग्लादेशी माल पर लागू नहीं होंगे।
विज्ञापन
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाकिस्तान के बाद अब भारत ने बांग्लादेश पर भी आर्थिक वार किया है। पड़ोसी मुल्क की लगातार हो रही भारत विरोधी गतिविधियों को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने बांग्लादेश से रेडीमेड कपड़ों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं के आयात के लिए बंदरगाह प्रतिबंध लगा दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। वहीं, अब सूत्रों ने कहा है कि भारत का बांग्लादेश के साथ व्यापार संबंध पारस्परिक शर्तों पर होगा। 

विज्ञापन


सूत्रों ने कहा कि बांग्लादेश को पूर्वोत्तर को अपने निर्यात के लिए बंदी बाजार के रूप में नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को यह समझने की जरूरत है कि वह द्विपक्षीय व्यापार की शर्तों को केवल अपने लाभ के लिए नहीं चुन सकता। चुनिंदा बांग्लादेशी निर्यातों को प्रतिबंधित करने के भारत के फैसले का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार में समानता और निष्पक्षता बहाल करना है। 

सूत्रों ने कहा कि बांग्लादेश से आरएमजी आयात को केवल दो बंदरगाहों (कोलकाता और न्हावा शेवा, मुंबई) तक सीमित करना बांग्लादेश द्वारा भारतीय यार्न और चावल पर समान व्यापार प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ बांग्लादेश को निर्यात किए जाने वाले सभी भारतीय सामानों पर चुनिंदा रूप से बढ़ा हुआ निरीक्षण कर लगाने का एक पारस्परिक उपाय है। 
विज्ञापन


सूत्रों ने बताया कि पड़ोसी देश में तैयार कपड़ों के निर्यात को प्रतिबंधित करने का फैसला ढाका द्वारा भारतीय धागे और चावल पर इसी तरह के व्यापार प्रतिबंध लगाने के जवाब में लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक बांग्लादेश से सभी निर्यातों को बिना किसी प्रतिबंध के अनुमति दी थी, लेकिन बांग्लादेश ने पूर्वोत्तर में पारगमन और बाजार पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया था। अब भारत द्वारा उठाए गए नए कदम से दोनों देशों के लिए समान बाजार पहुंच बहाल हो गई है।

सूत्रों ने कहा कि नई दिल्ली बांग्लादेश द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र को अपना कैप्टिव मार्केट मानने के भी खिलाफ है। बांग्लादेश को यह समझने की जरूरत है कि वह द्विपक्षीय व्यापार की शर्तों को केवल अपने लाभ के लिए नहीं चुन सकता है या यह नहीं मान सकता है कि पूर्वोत्तर उसके निर्यात के लिए एक बंदी बाजार है। उन्होंने कहा कि संसाधन संपन्न पूर्वोत्तर में अब उपलब्ध समान बाजार स्थान से आत्मनिर्भर भारत योजनाओं और नीतियों के तहत क्षेत्र में विनिर्माण और उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि भारत ने शनिवार को बांग्लादेश से तैयार कपड़ों को केवल कोलकाता और न्हावा शेवा समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से प्रवेश की अनुमति देने का फैसला किया। साथ ही पूर्वोत्तर में भूमि पारगमन चौकियों के जरिये कई उपभोक्ता वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी। इस प्रकार के बंदरगाह प्रतिबंध भारत से होकर गुजरने वाले और नेपाल-भूटान जाने वाले बांग्लादेशी माल पर लागू नहीं होंगे।

अधिसूचना के अनुसार, रेडीमेड गारमेंट्स (आरएमजी) के अलावा प्लास्टिक और पीवीसी तैयार माल, रंग, लकड़ी के फर्नीचर, कार्बोनेटेड पेय, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (बेक्ड माल, स्नैक्स, चिप्स और कन्फेक्शनरी), फलों के स्वाद वाले पेय, कपास और सूती धागे के कचरे को मेघालय, असम, त्रिपुरा और मिजोरम तथा पश्चिम बंगाल के फुलबारी व चंगराबांधा में भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों और जांच चौकियों के जरिये भारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ये भूमि बंदरगाह प्रतिबंध बांग्लादेश से मछली, एलपीजी, खाद्य तेल और कुचल पत्थर के आयात पर लागू नहीं होंगे। बांग्लादेशी उपभोक्ता वस्तुओं के लिए नए प्रतिबंध ऐसे समय लगाए जा रहे हैं, जब पांच हफ्ते पहले ही नई दिल्ली ने भारतीय हवाई अड्डों और बंदरगाहों के जरिये तीसरे देशों को बांग्लादेशी निर्यात माल के ट्रांस-शिपमेंट की लगभग पांच साल पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया था।

 रेडीमेड कपड़े व अन्य वस्तुएं यहां से ही आ सकेंगे
अब रेडीमेड कपड़े और कुछ अन्य बांग्लादेशी वस्तुओं को केवल कोलकाता और न्हावा-शेवा समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से ही प्रवेश की अनुमति होगी। बांग्लादेश रेडीमेड कपड़ों का एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक है और इस क्षेत्र में इसके निर्यात का मूल्य 2023 में 3800 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। भारत को इसका वार्षिक आरएमजी निर्यात करीब 70 करोड़ डॉलर का है तथा 93 प्रतिशत आरएमजी शिपमेंट जमीनी बंदरगाहों के जरिये भारत में प्रवेश करता है। 2023-24 में भारत-बांग्लादेश व्यापार 1290 करोड़ डॉलर था।

पूर्वोत्तर में 11 भूमि पारगमन चौकियां
भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार के लिए पूर्वोत्तर में 11 भूमि पारगमन चौकियां हैं। इनमें से तीन असम में, दो मेघालय में और छह त्रिपुरा में हैं।
 
बांग्लादेश ने पिछले महीने लगाया था प्रतिबंध
भारत ने पहले भी बिना किसी अनावश्यक प्रतिबंध के सभी स्थल व्यापार केंद्रों और बंदरगाहों के जरिये बांग्लादेशी वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि, मामले से परिचित लोगों ने बताया कि बांग्लादेश ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की सीमा से लगे भूमि सीमा शुल्क स्टेशनों (एलसीएस) और एकीकृत जांच चौकियों (आईसीपी) पर भारतीय निर्यात पर बंदरगाह प्रतिबंध लगाना जारी रखा है। भारत ने इस मुद्दे को ढाका के समक्ष उठाया था लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके अलावा, बांग्लादेश ने 13 अप्रैल से भारत से बंदरगाहों के जरिये धागे का निर्यात बंद कर दिया था। उन्होंने बताया कि भारतीय निर्यात को प्रवेश पर कठोर निरीक्षण से गुजरना पड़ता है तथा मौजूदा प्रतिबंधों के अतिरिक्त 15 अप्रैल से हिली और बेनापोल आईसीपी के माध्यम से भारतीय चावल के निर्यात की अनुमति नहीं है। बांग्लादेश की ओर से लगाए गए अनुचित रूप से उच्च और आर्थिक रूप से अव्यवहारिक पारगमन शुल्क के कारण पूर्वोत्तर राज्यों में औद्योगिक विकास प्रभावित हुआ है।

इसे भी पढ़ें- Amit Shah: 'आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते', अहमदाबाद से गृह मंत्री अमित शाह का पाकिस्तान को दो टूक संदेश
 
पूर्वोत्तर राज्यों को हो रहा था नुकसान
बांग्लादेश के इस दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप भारत के भीतरी इलाकों से पूर्वोत्तर तक पहुंच बंद हो गई। बांग्लादेश के भूमि-बंदरगाह प्रतिबंधों के कारण, पूर्वोत्तर राज्यों को स्थानीय रूप से निर्मित वस्तुओं को बेचने के लिए बांग्लादेश के बाजार तक पहुंच की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बाजार तक पहुंच केवल प्राथमिक कृषि वस्तुओं तक ही सीमित हो गई है। वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश को पूरे पूर्वोत्तर बाजार तक खुली पहुंच हासिल है। इससे अस्वस्थ निर्भरता पैदा हो रही है तथा पूर्वोत्तर राज्यों में विनिर्माण क्षेत्र का विकास अवरुद्ध हो रहा है।
 
इसलिए लिया गया फैसला
सूत्रों ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने और पूर्वोत्तर राज्यों में स्थानीय विनिर्माण को समर्थन देने के लिए, भारत ने असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में सभी एलसीएस और आईसीपी पर बंदरगाह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें- Lashkar-e-Taiba: लश्कर का टॉप कमांडर सैफुल्लाह पाकिस्तान में ढेर; RSS मुख्यालय पर हमले का था मुख्य साजिशकर्ता

पिछले साल से दोनों देशों के बीच तनाव
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव उस समय आया जब पिछले वर्ष अगस्त में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन के कारण अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ढाका से भारत आई। इसके बाद दोनों देशों के समग्र संबंधों में तनाव बढ़ गया। इसके अलावा हाल ही में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने विवादास्पद टिप्पणी की थी कि भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य भूमि से घिरे हुए हैं और उनके देश के अलावा समुद्र तक पहुंचने का उनके पास कोई रास्ता नहीं है। इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी थीं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें