नकदी तरलता में कमी के चलते हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) ने कर्ज बांटने में सुस्ती दिखाई है। देश की छह बड़ी एचएफसी ने सितंबर 2018 को समाप्त तिमाही में औसतन 25 हजार करोड़ रुपये लोन प्रतिमाह बांटा। इसमें से इन कंपनियों का प्रतिमाह औसत घटकर 13,500 करोड़ रुपये आ गया है।
इंडिया रेटिंग्स का कहना है कि एचएफसी के लोन बांटने में आई इस सुस्ती का असर खुदरा कर्जदारों के साथ प्रॉपर्टी डेवलपर्स पर भी होगा। अगर यह तंगी जारी रहती है तो निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए सामग्री जुटाने में दिक्कत आएगी और रियल एस्टेट क्षेत्र भी संकट में घिर जाएगा।