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दोस्ती पर जरूरतों को तरजीह: प्रतिबंधों के बाद भी रूस से क्रूड खरीद रहा भारत, पुरानी गलतियां दोहराना नहीं चाहता

Sat, 09 Jul 2022 06:43 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि रूस सस्ते दाम पर कच्चा तेल बेच रहा है। इसलिए हम रूस से खरीद जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत अगर रूस से खरीदारी बंद कर देता है एवं पूरी दुनिया भी उसी राह पर चलने लगी तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों ने मॉस्को पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाने के साथ रूस से कच्चा तेल खरीदना कम कर दिया। हालांकि, भारत का रुख इसके उलट रहा। इस दौरान भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीदा।

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8.19 लाख बीपीडी तेल खरीदा भारत ने मई में, एक साल पहले यह 33,000 बीपीडी था
भारत ने मई में 8.19 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कच्चा खरीदा, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 2.77 लाख बीपीडी और एक साल 33,000 बीपीडी रहा था। इसके साथ ही सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए रूस भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्ति वाला देश बन गया। इराक पहले स्थान पर है। 

...तो और बढ़ेंगे दाम
भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि रूस सस्ते दाम पर कच्चा तेल बेच रहा है। इसलिए हम रूस से खरीद जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत अगर रूस से खरीदारी बंद कर देता है एवं पूरी दुनिया भी उसी राह पर चलने लगी तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी।
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पुरानी गलतियां दोहराना नहीं चाहता भारत
रूसी तेल की मांग में गिरावट की भरपाई के लिए चीन के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा मददगार बनकर उभरा है। इसकी वजह से यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को को अलग-थलग करने की पश्चिमी देशों की कोशिश को झटका लगा है।

अधिकारी ने कहा कि ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद भारत ने वहां से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था, जबकि चीन खरीदार बना रहा। इससे चीन आर्थिक रूप से काफी लाभ मिला। इसलिए रूस के मामले में भारत उन पुरानी गलतियों को दोहराना नहीं चाहता है।

एनर्जी कंसल्टेंसी कमर एनर्जी के मुख्य कार्यकारी रॉबिन मिल्स का कहना है कि चीन अगर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है तो भारत क्यों नहीं खरीद सकता है।

दोस्ती पर जरूरतों को तरजीह
भारत सरकार के अधिकारियों का कहना है कि मोदी सरकार अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अच्छे रिश्तों को महत्व देती है। लेकिन, घरेलू जरूरतें पहले आती हैं और रूस ऊर्जा सहयोग के मामले में अमेरिका से बेहतर दोस्त रहा है। इसलिए छूट का दायरा कम होने के बावजूद भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता रहेगा।

अमेरिका और यूरोप को जवाब
रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले पर उठने वाले सवालों पर विदेशी मंत्री एस जयशंकर ने कहा था, भारत से आने वाले धन को यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तपोषण के रूप में क्यों देखा जाता है। यूरोप भी रूस से गैस खरीदता है।

उन्होंने कहा, यूरोप एवं अमेरिका ने तेल के अन्य स्रोत को पूरी तरह निचोड़ लिया है। फिर कहते हैं कि आप बाजार में नहीं जाएंगे। यह उचित दृष्टिकोण नहीं है।

सिर्फ तेल बेचकर रूस ने तीन माह में कमाए 24 अरब डॉलर

  • यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने तेल बेचकर सिर्फ तीन महीने में 24 अरब डॉलर की कमाई की।
  • ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने इस साल मार्च से मई के बीच रूस से 5.1 अरब डॉलर के तेल और अन्य ईंधन खरीदे। यह एक साल पहले के मुकाबले 5 गुना से अधिक है।
  • चीन ने रूस से तेल, गैस और कोयला खरीदने पर 18.9 अरब डॉलर खर्च किए।
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