भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए जो कि एक साल से भी कम समय में भारत की सबसे तेज व्यापार वार्ताओं में से एक समापन है। दिसंबर में समाप्त हुए इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत से होने वाले सभी निर्यातों पर शुल्क को समाप्त कर देगा, जबकि भारत दक्षिण प्रशांत देश से आयात होने वाले 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क कम कर करेगा। इस समझौते से वस्त्र, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा साथ ही कृषि और लघु व मध्यम उद्यमों के लिए विकास की प्रबल संभावना है।
न्यूजीलैंड के सभी 8,284 टैरिफ लाइनों पर टैरिफ समाप्त करने देने से भारतीय निर्यात को शुरुआत से ही शुल्क मुक्त बाजार मिलेगा। इसमें वस्त्र, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा साथ ही कृषि और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए प्रबल विकास की संभावना है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसानय क्षत्रों में भी वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
इस समझौते के तहत 20 अरब अमेरिकी डॉलर की दीघकालिक निवेश किया जाएगा और छोत्रों तथा कुशल पेशवरों के लिए नए अवसरों को पैदा करेगा।
भारत से न्यूजीलैंड को निर्यात आधारित क्षेत्रों में फार्मास्युटिकल उत्पादों का हिस्सा सबसे बड़ा है। जबकि यात्री वाहनों और पेट्रोलियम उत्पादों का महत्व भी बढ़ा है, जो उच्च मूल्य और रणनीतिक रूप से प्रतिस्पर्धी श्रेणियों में से एक हैं।
आयात के मामले में कच्चे माल यानी कोर रॉ मटीरियल, लकड़ी के लट्ठों और फेरस स्क्रैप के साथ ही एल्युमीनियम स्क्रैप और कोयले को भारत न्यूजीलैंड से आयात करता है। इसका इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन, रीसाइक्लिंग और औद्योगिक एनर्जी की जरूरतों से जुड़ी हुई मांग को पूरा किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों के व्यापार पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 के बीच न्यूजीलैंड को भारत के माल निर्यात में 13 प्रतिशत के सीएजीआर से वृद्धि हुई जो 488 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 711 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-फरवरी) में इस वृद्धि में कुछ सुधार देखा गया, जब माल निर्यात घटकर 524 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत के दौरान भारत ने अपने घरेलू किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए समझौता किया है। यह भारत के लिए अच्छा होगा क्योंकि इस समझौते से चुनिंदा कृषि उत्पादों के लिए प्रवेश आसान तो होगा साथ वैश्विक स्तर पर मौजूदा समय में जो दबाव देख रहे हैं, उससे यह राहत देगा। फिलहाल न्यूजीलैंड से आने वाले भेड़ के मांस, ऊन और कोयले के साथ ही उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाएगा। इस समझौते से कीवी, चेरी, एवोकाडो, पर्सिमोन और ब्लूबेरी जैसे फलो की भारतीय बाजारों में आसानी से मिल सकेंगे।