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Heatwave Alert: 2025 में 10% तक बढ़ सकती है बिजली की अधिकतम मांग, भीषण गर्मी में एसी का इस्तेमाल बनेगा कारण

Tue, 25 Mar 2025 01:01 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Heatwave: देश में लगातार बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की अधिकतम मांग में इस वर्ष 9 से 10 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है। विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि बढ़ती गर्मी के कारण एसी की बिक्री तेज गति से बढ़ और इसका दबाव ऊर्जा की खपत पर पड़ रहा है। इस साल बिजली की खपत पर जानकारों की क्या राय है, आइए जानते हैं विस्तार से।
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हीटवेव का खतरा - फोटो : istock
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विस्तार
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भारत को इस साल गर्मी में बिजली की अधिकतम मांग के दौरान नौ से 10 प्रतिशत की वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए। विशेषज्ञों ने देश में अत्यधिक गर्म हवाएं चलने की आशंका जताते हुए इस बारे में चेताया है। जानकारों का मानना है बढ़ती गर्मी के कारण एसी और वातानुकुल के दूसरे उपायों का इस्तेमाल बढ़ रहा है जिससे ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ रही है।

जलवायु परिवर्तन के बाद लगातार बढ़ रहा पारा

पिछले साल अखिल भारतीय स्तर पर बिजली की अधिकतम मांग 30 मई को 250 गीगावाट (GW) को पार कर गई थी, जो अनुमान से 6.3 प्रतिशत अधिक थी। जानकारों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी गर्मी बिजली की मांग को बढ़ाने वाला सबसे प्रमुख कारण है। वर्तमान में भारत की कुल बिजली खपत में उद्योगों, घरों और कृषि का योगदान क्रमशः 33 प्रतिशत, 28 प्रतिशत और 19 प्रतिशत है। 

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दिल्ली स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर में सीनियर प्रोग्राम लीड - रिन्यूएबल्स दिशा अग्रवाल के अनुसार, पिछले एक दशक में घरेलू बिजली की मांग सबसे तेजी से बढ़ी है। घरेलू बिजली खपत का हिस्सा 2012-13 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 25 प्रतिशत हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वृद्धि का श्रेय आर्थिक विकास और बढ़ते तापमान के कारण एयरकंडीशन की बढ़ती खपत को दिया जा सकता है।

पिछले साल एसी की खरीद 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ी

अग्रवाल ने कहा कि 2024 की गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान के बीच रूम एयर कंडीशनर की बिक्री में सालाना आधार पर 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा, "भारत को अब लंबे समय तक चलने वाली गर्म हवाओं और 9-10 प्रतिशत की अधिकतम बिजली मांग वृद्धि के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि, हमारा विश्लेषण दर्शाता है कि यह अधिकतम मांग केवल कुछ समय तक ही रहेगी।"

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अग्रवाल ने कहा कि भारत की बिजली खपत 2020-21 से सालाना करीब 9 फीसदी की दर से बढ़ रही है, जबकि पिछले दशक में यह 5 फीसदी सालाना के दर से बढ़ रही थी। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने अनुमान लगाया था कि 2022 से 2030 तक बिजली की मांग 6 फीसदी सालाना की दर से बढ़ेगी।

पिछले सप्ताह नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल की ओर से आयोजित "ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम" में, विशेषज्ञों ने गर्मी के मौसम में तापमान में वृद्धि के कारण एयर कंडीशनिंग की बढ़ती मांग के बारे में चिंता जताई। विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रेजिलिएंस पॉलिसी एवं फाइनेंस के प्रैक्टिस मैनेजर आभास झा ने कहा कि मध्यम उत्सर्जन परिदृश्य में भारत में हीटवेव की संख्या तीन गुनी होने की उम्मीद है।

हर 15 सेकंट में भारत में बेचा जाता है एक एयर कंडीशनर

उन्होंने कहा, "भारत वैश्विक स्तर पर एयर कंडीशनर का सबसे बड़ा बाजार बनने के लिए तैयार है। हर 15 सेकंड में भारत में एक एयर कंडीशनर बेचा जाता है। देश में एसी की पहुंच वर्तमान में लगभग 8 प्रतिशत है, जबकि विकसित देशों में यह 90 प्रतिशत है।"

झा ने कहा, "भारत में एसी की पहुंच बढ़ने जा रही है। समस्या यह है कि इनमें से अधिकांश एयर कंडीशनर अत्यधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। इसमें थ्री स्टार, बिना स्टार या बिना ब्रांड वाले एसी भी शामिल हैं जो बहुत अधिक ऊर्जा की खपत करते हैं। यदि हम इसी राह पर चलते रहे, तो अधिकतम तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस तो भूल ही जाइए, 2 डिग्री सेल्सियस की भी वृद्धि संभव  है।"

एसी में इस्तेमाल होने वाले ऊर्जा की मांग 2050 तक तीन गुना बढ़ेगी

कुछ साल पहले, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अनुमान लगाया था कि 2050 तक एयर कंडीशनर्स से ऊर्जा की मांग तीन गुनी हो जाएगी। इसका मतलब होगा अगले 25 वर्षों तक हर सेकंड 10 नए एयर कंडीशनर की खपत बढ़ेगी। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की अनुसंधान निदेशक राधिका खोसला ने कहा, "इस इजाफे के बावजूद, 2050 तक दो से पांच अरब लोगों के पास एयर कंडीशनर तक पहुंच नहीं होगी।"

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उन्होंने कहा कि चल रहे शोध से पता चला है कि पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में दो डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म दुनिया में एसी की सबसे अधिक मांग भारत से आएगी। इसके बाद चीन, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्राजील, फिलीपींस और अमेरिका का नंबर होगा।

पृथ्वी को नुकसान पहुंचाए बिना भी वातावरण को ठंडा रखना संभव

खोसला ने कहा कि पृथ्वी को नुकसान पहुंचाए बिना सभी के लिए वातानुकुलन की सुविधा प्राप्त करना संभव है। इसके लिए निष्क्रिय शीतलन विधियों, ऊर्जा दक्षता और हानिकारक रेफ्रिजरेंट गैसों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर ध्यान देने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि इन उपायों से शीतलन से जुड़े उत्सर्जन में 66 प्रतिशत की कमी आ सकती है। जबकि शेष कमी बिजली ग्रिड को डीकार्बोनाइज करने से आएगी।

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ऑक्सफोर्ड शोधकर्ता ने कहा कि वातानुकुलन केवल तापमान से जुड़ा नहीं है। इसमें आर्द्रता, वेंटिलेशन, रेडिएंट तापमान और कपड़ों का इन्सुलेशन भी शामिल है। उन्होंने कहा, "समाधान केवल एक तकनीक को चालू करने से कहीं आगे की बात है।"

पिछले साल देश में गर्मी के कारण आधिकारिक रूप से 143 मौंतें दर्ज

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, पिछले वर्ष भारत में असाधारण रूप से कठोर गर्मी पड़ी। 14 वर्षों में सबसे अधिक दिन हीटवेव चला।आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि सबसे गर्म और सबसे लम्बी गर्मी की लहरों में से एक के दौरान, भारत में 41,789 संदिग्ध हीट स्ट्रोक के मामले सामने आए जिसमें गर्मी के कारण 143 मौतें दर्ज की गई। इस साल गर्मी पिछले साल से बहुत पहले आ गई।

2024 में ओडिशा में पहली बार 5 अप्रैल को गर्मी का प्रकोप देखने को मिला था। लेकिन 2025 में कोंकण और तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों में 27-28 फरवरी को ही गर्मी का प्रकोप देखने को मिला। आईएमडी ने मार्च से मई तक चलने वाले ग्रीष्म ऋतु के दौरान देश के अधिकांश भागों में सामान्य से अधिक अधिकतम और न्यूनतम तापमान रहने का अनुमान लगाया है।

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